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Himachal: जमीन के नीचे क्या है, बताएगा एनसीएम सिस्टम; आईआईटी मंडी ने तैयार किया प्रोजेक्ट

Sat, 02 May 2026 10:53 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

आईआईटी मंडी का एनसीएम (नॉन-कॉन्टैक्टिंग) सिस्टम यह काम आसानी से कर देगा। इसका दुबई में सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।
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आईआईटी मंडी ने तैयार किया प्रोजेक्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जमीन के नीचे क्या छिपा है-गैस पाइपलाइन, बिजली के तार या अन्य ढांचा, अब इसका पता लगाने के लिए कड़ी मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। बिना इंसानी मदद और बिना खोदाई के यह काम संभव हो सकेगा। आईआईटी मंडी का एनसीएम (नॉन-कॉन्टैक्टिंग) सिस्टम यह काम आसानी से कर देगा। इसका दुबई में सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। मौजूदा समय में जमीन के नीचे की जांच इंसानी मदद से की जाती है, जो एक दिन में अधिकतम 5 किलोमीटर तक ही संभव होती है।

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जबकि एनसीएम सिस्टम के जरिये बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के 15 से 20 किलोमीटर तक सर्वे किया जा सकता है। यह डिवाइस लगातार आठ घंटे तक काम कर सकता है और इसे संचालित करने वाला व्यक्ति एक ही स्थान पर बैठकर इसकी निगरानी कर सकता है। यह जमीन के नीचे लगभग साढ़े तीन मीटर की गहराई तक मौजूद पाइपलाइन या अन्य संरचनाओं की सटीक जानकारी दे सकता है। पहले इन चीजों का पता लगाने के लिए खोदाई करनी पड़ती थी, जिसमें काफी समय लगता था।
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इस प्रोजेक्ट पर डॉ. नरेन, डॉ. अमित शुक्ला और उनकी टीम ने काम किया है। डॉ. शुक्ला इसे दुबई में इस्तेमाल कर चुके हैं, जहां गैस पाइपलाइन की जांच के लिए इसका उपयोग किया गया और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही भारत की बड़ी कंपनियां भी इस तकनीक को अपनाएंगी। यह डिवाइस उन लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है जो नया घर बनाने की योजना बना रहे हैं। इसके जरिए वे पहले ही यह जान सकेंगे कि जमीन के नीचे गैस पाइपलाइन या बिजली के तार मौजूद हैं या नहीं, जिससे खुदाई से पहले सही निर्णय लिया जा सके। 
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