अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर शिमला जिले के रामपुर स्थित हनुमानघाट मंदिर से भगवान श्रीराम की मूर्ति 181 साल वर्ष बाद बाहर निकली। इस दौरान शहर में श्रीराम की शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में राम भक्तों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पूरा रामपुर बाजार जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद और अन्य रामभक्तों ने श्रीराम और महर्षि वाल्मीकि की शोभायात्रा निकाली। हनुमान घाट मंदिर से भगवान राम की मूर्ति पालकी में सवार होकर बाहर निकली। इसके बाद पूरे शहर में भगवान राम की शोभायात्रा निकाली गई।
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रामपुर में सतलुज नदी के किनारे स्थित हनुमानघाट मंदिर है। वर्ष 1843 में महाराजा महिंद्र सिंह साहेब बहादुर के राज में वजीर रहे नेगी धर्म सेन साहेब ने अपने दाजा वजीर मनसुख दास साहेब की याद में इसे बनाया था। बताया जाता है कि यहां स्थित भगवान हनुमान की मूर्ति सतलुज नदी से प्रकट हुई है, जबकि यहां स्थापित की गई भगवान श्रीराम की मूर्ति अयोध्या से लाई गई। शहर में भगवान हनुमान का यह ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान के साथ भगवान श्रीराम विराजमान हैं। महाराजा के वजीर रहे पोवारी बिष्ट की ओर से बीती दो सदी से मंदिर की देखरेख की जा रही है। मंदिर के पुजारी एविंदर भारद्वाज ने बताया कि यह क्षेत्र का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान के साथ भगवान श्रीराम विराजमान हैं। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है।