पार्षद बोले-हमारी सैलरी काटो पर जनता को राहत दो, वन विभाग का तर्क, बंदर अब नगर निगम के हवाले
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बंदरों के काटने पर मुआवजा भी नहीं मिलेगा
निगम का तर्क, प्रदेश सरकार को भेजा प्रस्ताव अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी में लावारिस कुत्तों और बंदरों के आतंक पर मंगलवार को नगर निगम सदन में खूब हंगामा बरपा। बैठक में पार्षदों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए तो सदन के बाहर समाजसेवी संस्थाओं ने पीड़ित लोगों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया।
महापौर सुरेंद्र चौहान और उप महापौर उमा कौशल की अध्यक्षता में बचत भवन में हुई नगर निगम की मासिक बैठक में करीब डेढ़ घंटे तक इस मुद्दे पर हंगामा चलता रहा। हालांकि बैठक के अंत में जनता को कोई बड़ी राहत नहीं मिली। सदन में पार्षद विनीत शर्मा, नरेंद्र ठाकुर, सरोज ठाकुर, आशा शर्मा, निशा ठाकुर, ममता चंदेल, चमनप्रकाश, कमलेश मेहता समेत कई पार्षदों ने बंदरों और कुत्तों के आतंक का मामला उठाया। पूछा कि शहर की जनता को कब राहत मिलेगी। पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि हमारी पांच महीने की सैलरी काट दो लेकिन बंदरों-कुत्तों से राहत दिलाओ। बोले, आम जनता रोज पार्षदों से सवाल पूछ रही है कि कब राहत मिलेगी। नगर निगम ने प्रस्तुति के माध्यम से नियमों का हवाला दिया। निगम अधिकारियों ने कहा कि नियमानुसार ही नगर निगम काम कर सकता है। बताया कि हाईकोर्ट में 13 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई में निगम अपना पक्ष रखेगा। इसमें हमलावर कुत्तों को ज्यादा दिन तक बंद रखने की अनुमति ली जाएगी।
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मुआवजा देने को लेकर प्रशासन ने कहा कि यह नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। पार्षदों ने वन विभाग से राहत की मांग की। रेंज ऑफिसर सौरभ झिंग्टा ने कहा कि अब बंदर वन्यजीव की श्रेणी से बाहर हो गए हैं। इनके काटने पर मुआवजा नहीं मिलेगा। कुत्तों की तरह बंदरों का जिम्मा भी अब नगर निगम ही देखेगा। इस पर पार्षदों ने सवाल उठाए। सदन ने प्रस्ताव पारित किया कि नगर निगम तभी बंदरों का जिम्मा संभालेगा जब इनके लिए पहले से तैयार रेस्क्यू सेंटर और वन विभाग का स्टाफ निगम को दिया जाएगा। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।
पार्षदों ने दिए सुझाव, निगम जारी करेगा नोटिस सदन में पार्षदों के सुझाव भी लिए गए। विनीत शर्मा ने कहा कि समिट्री में कई डॉग लवर कुत्तों पर कार्रवाई करने से रोक रहे हैं। इन पर सख्ती हो। कांता सुयाल ने कहा कि निगम टीम के आने पर कुछ लोग इन कुत्तों को छिपा देते हैं। ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए जाएं। अंकुश वर्मा ने कहा कि संजौली में होटल वाले खुले में खाना खिला रहे हैं। पार्षद विशाखा मोदी ने नसबंदी के लिए डॉक्टर लाने का मामला उठाया। प्रशासन ने कहा कि इन सभी सुझावों को लिया जाएगा। वहीं गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार, मदद सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष विकास थाप्टा, कारोबारी करनैल सिंह समेत कई पार्षद सदन के बाहर कुछ देर के लिए धरने पर बैठे और मुआवजा देने तथा कुत्तों-बंदरों को पकड़ने की मांग उठाई।
यह फैसले भी लिए तीन अक्तूबर से कुत्तों को एंटी रैबीज के टीके लगेंगे। कुत्तों की होगी गणना, शहर के बाहर बनेंगे डॉग शेल्टर। खुले में खाना खिलाने वालों को जारी होंगे नोटिस। बैठक में न आने पर वन विभाग को नोटिस।