कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रधान सचिव को हिदायत दी कि यदि 23 मई तक मांगे गए कर्मियों की सूची पेश नहीं की तो वह स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहकर इसका कारण बताए।
कोर्ट ने सभी संबंधित विभागों को आदेश दिए थे कि शिमला कालका राष्ट्रीय उच्च मार्ग के दोनो तरफ निर्माण करने की इजाजत किस किस को दे रखी है। कोर्ट ने विशेषकर बड़ोग बाइपास और उसके नजदीक सड़क मार्ग की पूरी जानकारी मांगी थी और कहा था कि सड़क मार्ग के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध
निर्माण होते चले गए और संबंधित कर्मी हाईकोर्ट की ओर से मामले पर संज्ञान लेने के बावजूद सोते रहे। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को पूछा था कि क्यों न उनके खिलाफ
अवमानना के साथ साथ भ्रष्टाचार के मामले चलाये जाएं। कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद न तो किसी के खिलाफ विभागीय कार्यवाई हुई और न ही दोषियों के नाम कोर्ट को बताए गए। मामले पर सुनवाई 23 मई को होगी।