अस्पताल रोड से होते हुए पुराने स्टेट बैंक पार्क, कलाकेंद्र के पीछे से, ढालपुर चौक होकर राजा की चानणी के पास जलेब समाप्त हुई। महाराजा कोठी के आराध्य देवता देवता जमदग्रि ऋषि, खल्याणी के देवता ब्राधी वीर, जोंगा के हुरगू काली नारायण, जौंगा के देवता महावीर, कमांद के देवता वीरकैला, लोट के गढ़पति वीरकैला ने शोभा यात्रा में भाग लिया। ये सभी देवता राजा की पालकी के साथ चले। ढोल नगाड़ों की थाप पर कई देवलु भी थिरके।
गौर रहे कि भगवान नरसिंह अपने पूरे क्षेत्र की परिक्रमा कर सुरक्षा की कार बांधते है। जहां से भी भगवान नरसिंह की जलेब गुजरती है, वहां अस्थायी शिविरों में बैठे सभी देवी-देवता शेष पूल देते हैं। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह का कहना है कि नरसिंह भगवान की जलेब में प्रतिदिन अलग-अलग क्षेत्रों के देवी-देवता शामिल होते हैं। दशहरा उत्सव में शामिल हुए विदेशी मेहमानों ने भी जलेब का लुत्फ उठाया। पर्यटकों ने इन लम्हों को कैमरों में भी कैद किया।