चर्चाओं का बाजार गर्म, सीट के कई हैं दावेदार
आठ विधानसभा क्षेत्रों के लिए चुना जाना है शिमला ग्रामीण जिलाध्यक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कांग्रेस के शिमला ग्रामीण जिलाध्यक्ष की ताजपोशी अटकने से पार्टी में सियासत गरम हो गई है। पार्टी आलाकमान ने 11 जिलों के अध्यक्ष तो चुन लिए हैं, लेकिन किन्नौर समेत शिमला ग्रामीण जिलाध्यक्ष के लिए नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है। इस सूची में शिमला ग्रामीण अध्यक्ष का पद सबसे अहम माना जा रहा है। इसके कारण चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सूत्रों के अनुसार शिमला ग्रामीण जिलाध्यक्ष पद पर दो गुटों की आपसी टकराहट के चलते नियुक्ति अगले कुछ दिनों तक टल सकती है। इस पद के लिए दस से अधिक दावेदारों ने आवेदन किया है। इनमें ज्यादातर मंत्री विक्रमादित्य सिंह गुट से संबंधित हैं, जबकि बाकी दूसरे गुट के हैं। पिछले सालों में इस पद पर ज्यादातर समय हॉलीलॉज के करीबी को तैनाती मिली है। इस बार दोनों गुटों में किसे वरीयता मिलेगी, इस पर सभी की निगाहें लगी हैं।
जिलाध्यक्ष पद के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में तीन मंत्री और चार विधायक शामिल हैं। ऐसे में इन सभी के सुझाव के अलावा मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष की सहमति के बाद ही शिमला ग्रामीण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति तय होगी।
आठ जनवरी को बैठक
बाकी जिलों के अध्यक्षों की पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के साथ आठ जनवरी को बैठक होगी। इसमें जिलों में कार्यकारिणी बनाने और विस्तार के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद जिलाध्यक्ष अपनी टीम के गठन के लिए बैठकें शुरू कर सकते हैं।