विधि शिक्षा में मूल संरचना सिद्धांत को विषय के रूप में करें शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू) शिमला में प्रस्तावना और मूल संरचना सिद्धांत : न्यायिक व्याख्या-सांवैधानिक प्रगति विषय पर चौथा न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर व्याख्यान हुआ। व्याख्यान का मुख्य संबोधन सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं विश्वविद्यालय के विशिष्ट प्रोफेसर माननीय न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने दिया।
न्यायमूर्ति खन्ना ने संविधान की प्रस्तावना को भारत के लोकतांत्रिक चरित्र की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि हम भारत के लोग वाक्यांश नागरिकों की सामूहिक इच्छा और समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के आदर्शों को सशक्त करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि विधि शिक्षा में मूल संरचना सिद्धांत को एक स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल किया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थी संविधान की मूल भावना को गहराई से समझ सकें। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया, न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. प्रीति सक्सेना, अजय मोहन गोयल, संदीप शर्मा, रंजन शर्मा, बिपिन चंद्र नेगी, राकेश कैंथला, जिया लाल भारद्वाज और रोमेश वर्मा सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संधावालिया ने न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 21 के माध्यम से मौलिक अधिकारों की व्याख्या को नए आयाम दिए। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अय्यर व्याख्यान शृंखला सांवैधानिक विचार-विमर्श और न्यायिक संवाद को प्रोत्साहित करने का माध्यम बन चुकी है।
डिजिटल लाइब्रेरी से तकनीकी युग में कदम
एचपीएनएलयू शिमला में शिक्षा को डिजिटल दिशा देने के उद्देश्य से अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारंभ भी किया गया। इसका उद्घाटन न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने किया। लाइब्रेरी को हाइब्रिड आरएफआईडी प्रणाली से सुसज्जित किया है जो पुस्तकों के चेक-इन और चेक-आउट को स्वचालित बनाती हैं। लाइब्रेरी में पैट्रन ट्रैफिक काउंटर (पीटीसी) प्रणाली भी स्थापित की है, जिससे प्रवेश और निकास पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हो गए हैं। यह पहल विश्वविद्यालय को स्मार्ट लर्निंग हब में बदलने की दिशा में अहम कदम साबित होगी।