कांग्रेस सरकार ने पेश किया बैक गियर वाला बजट : बिंदल
शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सरकार के बजट को हिमाचल प्रदेश को पीछे ले जाने वाला बैक गियर बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में ऐसा बजट कभी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में हजारों करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई हो। डॉ. बिंदल ने कहा कि 4000 करोड़ की कटौती का सीधा असर प्रदेश की विकासात्मक योजनाओं पर पड़ेगा। इससे हर क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे मत्स्य पालन, कृषि, बागवानी, पशुपालन आदि के बजट को केवल केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रावधानों से जोड़कर किताब मोटी करने का काम किया है, जबकि वास्तविक राज्य स्तरीय पहल नगण्य है।
प्रदेश की प्रगति रोकने वाला दिशाहीन बजट : धमूल
पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश बजट 2026 की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे प्रदेश की प्रगति को बाधित करने वाला और दूरदृष्टि से विहीन बजट करार दिया। मीडिया को दिए बयान में उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3,586 करोड़ की कमी यह दर्शाती है कि सरकार विकास कार्यों को गति देने के बजाय उन्हें सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कटौती का सीधा असर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसी बुनियादी योजनाओं पर पड़ेगा। बजट में कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में राज्य सरकार की ओर से ठोस नई पहल का अभाव है। अधिकतर प्रावधान केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर आधारित हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश का विकास आज भी केंद्र सरकार के सहयोग पर ही निर्भर है। कांग्रेस सरकार की ओर से 2022 में दी गई गारंटियां आज भी अधूरी हैं। एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। किसानों से जुड़े वायदों में भी कटौती देखने को मिल रही है। बजट में कानून व्यवस्था सुधार, अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता और बंद किए गए संस्थानों को पुनः खोलने के लिए कोई ठोस वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है।
बजट निराशाजनक, जनता पर पड़ेगा महंगाई का बोझ : आप
आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डाॅ राजेश चानना ने हिमाचल प्रदेश बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि यह जनता को राहत देने के बजाय महंगाई बढ़ाने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में बड़ी घोषणाएं तो की गईं, लेकिन चुनावी गारंटियों पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ। उन्होंने 5 लाख रोजगार, महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्टार्टअप फंड जैसी घोषणाओं को अधूरा बताया। साथ ही प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कर्ज बढ़ने और कर्मचारियों के वेतन में देरी का मुद्दा उठाया। पार्टी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग क्षेत्र में भी ठोस पहल न होने की बात कही। डॉ. चानना ने सरकार से वादों को जमीन पर लागू करने और जनता को वास्तविक राहत देने की मांग की।
3,586 करोड़ की कटौती, वेतन स्थगन से टूटा कर्मचारियों का मनोबल : परमार
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक विपिन परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का बजट कमजोर आर्थिक स्थिति और गलत नीतियों का स्पष्ट प्रमाण है। पिछले वर्ष के 58,514 करोड़ के मुकाबले इस बार बजट में 3,586 करोड़ की कटौती की गई है। इससे साफ है कि सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में असमर्थ हो चुकी है। विपिन परमार ने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा अगले 6 महीने के लिए स्थगित करना इस बात का संकेत है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में है। इसके अलावा ग्रुप-ए और ग्रुप-बी अधिकारियों के वेतन का 3 फीसदी हिस्सा भी स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ने वाला है और सरकार की नीतिगत विफलता का सीधा प्रमाण है। उन्होंने विशेष रूप से आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने उनके लिए न्यूनतम 13,750 प्रतिमाह तय करने की बात तो की है, लेकिन यह राशि आज के महंगाई भरे दौर में बेहद अपर्याप्त है। परमार ने कहा कि एक ओर सरकार वेतन स्थगित कर रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे-छोटे मानदेय बढ़ाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारियों को समय पर वेतन, भत्ते और पेंशन मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार उनसे ही बलिदान मांग रही है। उन्होंने कहा कि यह बजट कर्मचारियों, आउटसोर्स कर्मियों और आम जनता के साथ अन्याय का दस्तावेज है।