आईजीएमसी में दाखिल पत्नी के लिए सोहन सिंह को बाहर से ख्ररीदना पड़ रही हैं दवाएं, कैंसर रोग से ग्रसित है पत्नी
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लोगों बोले, योजना का पूरी तरह दिया जाए लाभ अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में हिम केयर और आयुष्मान योजना की करोड़ों की बकाया देनदारी के चलते मरीजों को निशुल्क उपचार की सुविधा नहीं मिल रही है। बकाया बिल न चुकाने पर दवा कंपनियों ने उपकरण और दवाएं देना बंद कर दी हैं।
महिला सर्जिकल वार्ड में दाखिल 67 वर्षीय पत्नी के निशुल्क उपचार के लिए कुमारसैन के 76 वर्षीय बुजुर्ग सोहन सिंह राणा को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हिम केयर योजना के तहत कार्ड धारक सोहन सिंह को इस योजना के तहत अस्पताल से कुछ ही दवाएं निशुल्क मिल रही हैं, बाकी आठ-आठ हजार की दवाएं बाहर निजी दुकानों से खरीदनी पड़ रही हैं। कैंसर और एपेंडिक्स सहित गंभीर रोगों से ग्रसित उनकी पत्नी एक माह से आईजीएमसी में भर्ती है। सोहन सिंह ने बताया कि कमला नेहरू अस्पताल में उसकी पत्नी की बच्चादानी निकाल दी थी और इसी योजना के तहत मुफ्त में ऑपरेशन हुआ था। जांच के बाद कैंसर रोग का पता लगने पर उसे आईजीएमसी में भर्ती करवाया है। अस्पताल में संचालित निजी लैब में उनके कई टेस्ट नहीं हुए जिससे बाहर निजी लैबों में हजारों रुपये देकर करवाना पड़ा। उन्होंने बताया कि मंगलवार को भी तीन दवाएं डॉक्टरों ने लिखी जिसमें से एक दवाई ही मुफ्त में मिली बाकी बाजार से खरीदना पड़ीं। लोगों ने सरकार से अस्पतालों में दाखिल मरीजों को इस योजना के तहत निशुल्क उपचार की पहले की तरह मुहैया करवाने की मांग की। हिम केयर योजना का भी कार्ड धारकों को सीमित लाभ ही मिल पा रहा है। इसमें जो दवाएं स्टॉक में हैं, वही मरीजों को मिल रही हैं। बाकी दवाएं मरीजों को बाहर निजी दुकानों से खरीदना पड़ रही हैं। हिमकेयर में पंजीकृत मरीजों को पांच लाख तक की मुफ्त उपचार की सुविधा मिलती है।
तीमारदारों को गुमराह कर रहे एजेंट
निजी लैबों के एजेंट आईजीएमसी के आसपास घूमते रहते हैं। तीमारदार और मरीज के हाथ में टेस्ट की पर्ची को देखकर वह उन्हें अपनी लैब में सस्ती दरों पर टेस्ट करवाने का झांसा देकर ले जाते हैं। इसके बाद लैब में महंगी दरों पर टेस्ट करवाकर चूना लगाते हैं। अस्पताल में बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा है, बावजूद इसके परिसर के मुख्य गेट के बाहर लैब के एजेंट सक्रिय हैं। अस्पताल प्रबंधन को इस गोरखधंधे पर अंकुश लगना चाहिए।