हिमाचल प्रदेश में रोप-वे की ऊंचाई भवनों, पेड़ों आदि से डेढ़ से पांच मीटर ही होगी। अभी तक इसमें मौजूद 10 मीटर की शर्त को हटा दिया गया है। रोप-वे निर्माण में रुकावट डालने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। गुरुवार को सदन में चर्चा के दौरान हल्की नोकझोंक के बीच रोप-वे बिल पारित हो गया। बुधवार को ये विधेयक सदन में पेश किया गया था।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन में आकाशी रज्जू मार्ग (संशोधन) विधेयक -2019 को सदन के पटल पर पारित करने का प्रस्ताव रखा। विपक्ष के चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोप के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जवाब दिया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल में रोप-वे को ज्यादा ये ज्यादा संख्या में बनाना जरूरी है।
शिमला और मनाली में पर्यटक यातायात जाम में फंस रहे हैं। इससे गलत संदेश जा रहा है। हर बात पर वहम करना सही नहीं है। हमें विधानसभा भी आना हो तो दस मिनट पहले चलना होता है कि कहीं जाम में न फंस जाएं। भवनों से 10 मीटर ऊंचाई का मतलब है 30 फुट का स्पैन बढ़ा लेना। हमें व्यावहारिकता और तकनीकी तमाम बातें देखनी होंगी।
रोप-वे के मानकों के अनुसार भवनों या धरातल के किसी ढांचे से रोप-वे की ऊंचाई डेढ़ से पांच मीटर होनी चाहिए। इसका ध्यान रखा गया है। हम इन्हीं नियमों के दायरे में रहकर रोप-वे बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अनावश्यक विरोध सही नहीं है। कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर ने सोलंग नाला और नयना देवी रोप-वे में 500 से 700 रुपये तक किराया लेने पर इसे कम करने का मामला उठाया।
उन्होंने बिल में संशोधन कर रोप-वे की ऊंचाई घटाकर कम करने को सही कदम नहीं बताया। इस बिल पर चर्चा के बाद स्पीकर डा. राजीव बिंदल ने नयना देवी के कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर को कहा कि वे क्या अपने संशोधन प्रस्ताव को वापस लेते हैं। रामलाल ठाकुर ने इस बारे में अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। इसके बाद सदन में यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।