लाखों के फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी करने के मामले में पुलिस कर रही है छानबीन, कई कर्मचारी और अधिकारी शक के दायरे में
68.31 लाख के गड़बड़झाले का है मामला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ग्रामीण विकास विभाग में लाखों के फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले में आरोपों के घेरे में आया एक कर्मचारी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया है। यह मामला 68.31 लाख के गड़बड़झाले का है।
कर्मचारी की पुलिस हर संभव जगह पर तलाश कर रही है लेकिन उसका अभी तक पता नहीं चला है। वहीं परिजनों ने भी इस संबंध में पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस अब कर्मचारी को तलाश कर मामले में आगामी कार्रवाई करने का प्रयास कर रही है। यह कर्मचारी डेढ़ महीने से लापता है। पुलिस की अभी तक की जांच में विभाग के कई कर्मचारी और अधिकारी शक के दायरे में हैं। इसको लेकर पुलिस ने कई कर्मचारियों और अफसरों के हस्ताक्षरों के नमूने लिए हैं। इनके फर्जी सेंक्शन ऑर्डर में किए हस्ताक्षरों का हैंडराइटिंग एक्सपर्ट के जरिये मिलान कर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा संबंधित शाखा के कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए तलब किया जा रहा है।
मामला उस समय सामने आया जब लाहौल-स्पीति के केलांग में एडीसी टू डीसी एवं एसडीएम लाहौल कल्याणी गुप्ता ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि वह जून 2022 से 5 जुलाई 2025 तक ग्रामीण विकास निदेशालय शिमला में बतौर डिप्टी सीईओ (एचपीएसआरएलएम) के पद पर तैनात थीं। इसी बीच 27 सितंबर को उन्हें जानकारी मिली कि एक सेंक्शन आर्डर पर उनके हस्ताक्षर पाए गए हैं। इसकी तिथि सितंबर 2025 है, जबकि वह इस समय अवधि में विभाग में सेवाएं नहीं दे रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए हैं। इसमें एक कंपनी के नाम पर 68,31,200 रुपये का सेंक्शन ऑर्डर रिसीव करवाया है।
अभी तक तीन एफआईआफ दर्ज
ग्रामीण विकास विभाग में लाखों के फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी होने के मामले में पुलिस के पास तीन अलग-अलग शिकायतें आ चुकी हैं। इसमें पुलिस ने छोटा शिमला और बालूगंज थाना में एफआईआर दर्ज की हैं। विभाग के निदेशक की ओर से भी फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी होने के मामले में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। आरोप लगाया है कि फर्जी पत्र जारी करने के लिए फर्जी हस्ताक्षर के साथ ही फर्जी स्टांप का इस्तेमाल किया है। अब पुलिस इस बात की छानबीन कर रही है कि विभाग में कितने लंबे समय से यह गड़बड़झाला चल रहा था और इसमें कितने लोग संलिप्त हैं।