शिक्षकों के तबादलों को लेकर बड़ी खबर आई है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिक्षकों के तबादलों को लेकर अहम बयान दिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में किसी भी शिक्षक का तबादला तीन साल से पहले नहीं होगा। शिक्षकों को तीन वर्षों के तय कार्यकाल में अपनी सेवाएं देते रहना होगा।
तय समय से पहले उनका तबादला नहीं होगा। सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि तय समय से शिक्षकों के तबादले होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने शिमला में शिक्षकों के लगातार तबादले होने की इस समस्या को अधिक गंभीर कहा। उन्होंने इसके
लिए एक सख्त नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सत्र के बीच में अध्यापकों के स्थानांतरण को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को अपनी इच्छा से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान करने का विकल्प चुनना चाहिए।
सीएम बोले, पढ़ाने की बजाय तबादले में व्यस्त रहते हैं शिक्षक
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला फागली में सीएम वीरभद्र सिंह।
सीएम वीरभद्र सिंह शनिवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला फागली में संबोधित कर रहे थे। वीरभद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने देखा है कि कुछ अध्यापक हमेशा ही शिक्षण व्यवसाय की बजाय तबादले में व्यस्त रहते हैं। इसी कारण हिमाचल सरकार ने अपरिहार्य कारणों को छोड़कर शिक्षकों के तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार खेलों में विशेष बच्चों को शामिल करने पर अधिक ध्यान देगी। सीएम वीरभद्र सिंह ने रूसा प्रणाली को अच्छा करार देते हुए कहा कि कुछ संगठन इस बारे में गलत प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूसा प्रणाली में अधिक मेहनत कर रहे हैं, मगर कुछ अध्यापक ऐसा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अध्यापकों का नियुक्ति से पूर्व मनोवैज्ञानिक परीक्षण का भी सुझाव भी दिया,
जिससे ये सुनिश्चित हो सके कि वे शिक्षण व्यवसाय में रुचि रखते हैं या नहीं। इससे शिक्षा के प्रति समर्पित अध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें समर्पित अध्यापकों की आवश्यकता है और बहुत से अध्यापक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी बेहतर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त समय दें शिक्षक
उन्होंने कहा कि हमें ऐसे अध्यापक जो प्रदेश के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देकर अपने व्यवसाय के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं, उनको सामने लाना चाहिए। इससे अन्य उनसे प्रेरणा ले सकेंगे। इससे पूर्व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, फागली की प्रधानाचार्य वीना शर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
इस अवसर पर शहर के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यापकों को शिक्षण को व्यवसाय के रूप में लेने की बजाय इसे मिशन के रूप में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त समय देकर कक्षाएं लगानी चाहिए।
अध्यापकों का हमेशा ही यह उद्देश्य होना चाहिए कि वे अच्छे विद्यार्थी तैयार करने के साथ-साथ उन्हें एक अच्छा इंसान भी बनाएं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में स्नातकोत्तर अध्यापकों के 1300, प्रशिक्षित स्नातक अध्यापकों के 950, जेबीटी के 600, सीएंडवी अध्यापकों के 1500 तथा सहायक प्रोफेसरों के लगभग 620 पदों को भरने की प्रक्रिया प्रगति पर है।
सेटेलाइट अध्ययन से जुड़ेंगे हिमाचल के 280 विद्यालय
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि हिमाचल सरकार वर्चुअल क्लासरूम के तहत राज्य के 280 स्कूलों और चार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) को सेटेलाइट अध्ययन से जोड़ेगी। इसमें प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के चार स्कूल भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के तहत हिमाचल की 385 पाठशालाओं में सूचना एवं प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा निशुल्क प्रदान की जा रही है।
इसमें लगभग 15000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शनिवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला फागली में वैल्यूयेबल एडुटेनमेंट ग्रुप मुंबई की ओर से ‘वेरी स्माल अर्पचर टर्मिनल : वीसेट’ के माध्यम से बेहतरीन शिक्षकों की ओर से वर्चुअल क्लास रूम से गुणात्मक और डिजिटल शिक्षा प्रदान करने संबंधी दी गई प्रस्तुति की सराहना की।
मुख्यमंत्री बोले, साक्षरता दर 88 प्रतिशत
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी हिमाचल के लिए बेहतरीन है, क्योंकि हिमाचल में पाठशालाएं दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों के बराबर गुणात्मक शिक्षा प्राप्त करने के समान अवसर प्राप्त होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य की श्रेणी में है और यहां पर साक्षरता दर 88 प्रतिशत है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्चुअल क्लास रूम के उपयोग से विद्यार्थियों को अध्ययन के पर्याप्त अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
योजना के तहत 2138 पाठशालाओं को लाया
प्रधान सचिव शिक्षा आरडी धीमान ने कहा कि भारत सरकार की सूचना, संचार एवं प्रौद्योगिकी (आईसीटी) योजना में वर्ष 2005-2006 में 628 स्कूलों को चयनित किया गया था और वर्ष 2015 के दौरान द्वितीय चरण में 1525 स्कूल शामिल किए गए।
वर्तमान में इस योजना में 2138 पाठशालाओं को लाया गया है और 50 पाठशालाओं के पास अपने मल्टी मीडिया केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि आईसीटी में इंटरनेट और ई-कांटेंट उपयोग के लिए 7000 स्कूली अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया।
किसी भी मौसम में बिना रुकावट के कार्य करती है ये प्रणाली
मुंबई के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी संजय चवान ने वीसेट के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि किस प्रकार यह प्रणाली सभी मौसमों में बिना रुकावट के कार्य करती है और इसके उपयोग से विद्यार्थियों को अपने अध्ययन अनुभव को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के विद्यार्थियों ने मुंबई स्थित केंद्रीय स्टूडियो में बैठे अनुभवी अध्यापकों
से सीधा वार्तालाप किया और विशेषज्ञ ने विद्यार्थियों द्वारा पूछ गए प्रश्नों का सीधा उत्तर दिया। नगर निगम शिमला के पार्षद शशी शेखर चीनु, निदेशक उच्च शिक्षा दिनकर बुड़ाथोकी, निदेशक एसएसए घनश्याम चंद, मुख्यमंत्री के ओएसडी अमित पाल सिंह, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला की प्रधानाचार्य वीना शर्मा, वेल्यूएबल ग्रुप के राजीव गोदरा और अन्य इस अवसर पर उपस्थित थे।