उधर, सहज ढाबा असल में रेत के पहाड़ पर खड़ा था। जिस जगह ढाबे का निर्माण हुआ है, उससे ठीक ऊपर की तरफ काफी साल पहले रेत की खान थी। यहां से निकलने वाले मलबे को कुमारहट्टी-नाहन मार्ग के नीचे फेंका जाता था। कुछ साल पहले खान बंद हो गई। इस दौरान जो कच्ची मिट्टी फेंकी गई थी उस पर घास की पकड़ मजबूत हो गई और एक ढलान तैयार हो गई।
नाहन मार्ग के इस हिस्से में आधा दर्जन से ज्यादा बहुमंजिला भवन बने हुए हैं और ज्यादातर होटल या पीजी के रूप में चल रहे हैं। सहज ढाबा भी इनमें से ही एक था। कच्ची जमीन पर क्षमता से अधिक बोझ भवन गिरने की मुख्य वजह के रूप में सामने आ रही है। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि जमीन ज्यादा वजन झेलने के लायक नहीं थी। जो भवन का स्ट्रक्चर बनाया गया था उसके बेसमेंट को अच्छी तरह से पक्का नहीं किया गया था।
भुरभुरी मिट्टी पर महज कुछ फीट की खुदाई के बाद पिलर दे दिए गए थे जो ढाबे के वजन का दबाव बर्दाश्त नहीं कर पाए और ढाबा धराशायी हो गया। जहां रविवार को हादसा हुआ है उस जगह से तीन भवन पहले कुमारहट्टी की तरफ एक भवन कुछ साल पहले भी धराशायी हुआ था। लेकिन उस हादसे में कोई भी हताहत नहीं हुआ। इस बीच धड़ाधड़ बहुमंजिला भवनों का निर्माण चलता रहा और अब कच्ची मिट्टी पर कई भवन तैयार हो गए हैं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई : उपायुक्त
उपायुक्त केसी चमन ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त भवन की जांच शुरू कर दी गई है। एसडीएम सोलन को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जो आगामी 15 दिन में हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद रिपोर्ट सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने कहा कि अन्य भवनों की भी जांच होगी और जो नियमों से बाहर पाए गए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भवन के गिरने के कारणों समेत उसके निर्माण की जांच होनी है।