33 करोड़ के भ्रष्टाचार के बाद तलाई सहकारी सभा को भंग कर दिया गया है। उच्च न्यायालय के आदेशानुसार इस सभा को अब प्रशासक के हवाले कर दिया गया है। सभा सचिव और पूर्व सदस्य ने प्रबंधन समिति पर सवालिया निशान खड़ा किया था कि उक्त प्रबंधन समिति का चयन नियमों को ताक पर रख कर किया गया है। याचिका उच्च न्यायालय में दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने सभा को भंग करने के आदेश जारी किए हैं।
इसकी कापी सभी बैंकों और सभा से संबंधित विभागों को दे दी गई है। अब सभा का कार्य प्रशासक के सहारे चलेगा। सभा में लगभग दस हजार सदस्य हैं। सभा ने लगभग सवा सौ करोड़ रुपये का कारोबार किया था। ऑडिट में खुलासा हुआ कि इस दौरान 33 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार कर दिया गया। इसके बाद सभा सचिव सहित प्रबंधन समिति के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
सहकारी सभाएं कार्यालय बिलासपुर में कार्य को चलाने के लिए एक नई प्रबंधन समिति का गठन कर दिया गया। इस पर सभा सचिव और पूर्व में रहे एक सदस्य ने चुनौती दी थी। अब यह फैसला आया है कि वर्तमान कमेटी को भंग कर कार्य प्रशासक के हवाले कर दिया जाए।