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स्विट्जरलैंड की तर्ज पर यहां लगेगा ये सिस्टम, अब लोग नहीं होंगे लापता

Mon, 01 Oct 2018 12:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
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भारी बर्फबारी के बीच जिंदगियों को बचाने के लिए रोहतांग दर्रे के विभिन्न हिस्सों में रेडियो फ्रीक्वेंसी से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह सर्विलांस सिस्टम स्विट्जरलैंड की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इससे बर्फ में लोगों के फंसे होने की सटीक जानकारी मिलेगी। इसी आधार पर बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सकेगा।

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रोहतांग दर्रे के बीच मुख्य जगहों पर इन कैमरों को लगाया जाएगा। इसी के साथ आपदा के दौरान हर स्थिति की जानकारी के लिए कुल्लू के सभी उपमंडलों को एक-एक सैटेलाइट फोन दिया जाएगा।

मनाली उपमंडल में सर्दी के सीजन में ज्यादा लोग फंसते हैं, ऐसे में यहां एक अतिरिक्त सैटेलाइट फोन दिया जाएगा। डीसी यूनुस ने बताया कि जिला में सैटेलाइट फोन के जरिए कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जाएगा। किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान इसकी अहम भूमिका रहती है।

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भूस्खलन की सूचना पर रोका जाएगा यातायात

कुल्लू जिला की मुख्य सड़कों पर बार-बार हो रहे भूस्खलन को लेकर कुल्लू प्रशासन आईआईटी मंडी की टीम के साथ संपर्क में है। टीम के मैकेनिज्म के तहत भूस्खलन होने की आशंका की पूर्व सूचना पर यातायात को रोककर खतरे को टाला जाएगा।

रोहतांग टनल से होकर मनाली-लेह मार्ग बहाल- सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेह-मनाली मार्ग को रोहतांग टनल के रास्ते वाहनों के लिए रविवार को बहाल कर दिया। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अनुसार वाहन रोहतांग टनल के रास्ते मनाली की ओर भेजे जा रहे हैं। रोहतांग दर्रा बहाल नहीं हुआ है। वहीं, बीआरओ ने रिकॉर्ड छह दिन में रोहतांग से लेकर सूबे की अंतिम सीमा सरचू तक करीब 200 किमी के दायरे से बर्फ हटाई।

22 से 24 सितंबर के बीच हुए हिमपात के कारण 3 से 8 फीट तक बर्फ जम गई थी। इससे बारालाचा, सरचू, पटेसउ, जिंगजिंगबार, सूरजताल और भरतरपुर में करीब 500 सैलानी फंस गए थे। इन्हें अब हवाई और ग्राउंड रेस्क्यू ऑपरेशन से बचा लिया गया है। बीआरओ 70 आरसीसी के सेकंड-इन-कमांड कैप्टन मेहुल ने बताया कि बर्फ में फंसे सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाने के लिए संगठन के अधिकारियों और जवानों ने शून्य से नीचे तापमान में दिन रात बर्फ हटाने का अभियान जारी रखा।

संगठन के जवानों ने अपनी जान दांव पर लगाकर महज 6 दिनों में बर्फ से लकदक 16500 फीट ऊंचे बारालाचा समेत रोहतांग दर्रे के 200 किमी के दायरे से बर्फ हटाकर सरचू तक सड़क बहाल की है। बीआरओ की ओर से सबसे कम अवधि में इतने बड़े दायरे से बर्फ हटाने का रिकॉर्ड बना है। अभियान में बीआरओ ने डोजर, रोलवा, स्नोकटर, जेसीबी, एस्केवेटर समेत कई जवानों को तैनात कर रखा था।

सरचू मार्ग बहाल होने के बाद रविवार को सेना का काफिला दालंग ट्रंाजिट कैंप से सरचू की तरफ रवाना हुआ। सड़क बहाली के साथ बीआरओ ने रेस्क्यू अभियान में भी अहम भूमिका निभाई है। बारालाचा, जिंगजिंगबार, सूरजताल, पटसेउ, रोहतांग, ग्रांफू और बातल-छोटा दड़ा में फंसे करीब 450 सैलानियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
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बीआरओ ने छह दिन में रिकॉर्ड 200 किलोमीटर से हटाई बर्फ

भारी बर्फबारी से बंद पड़े रोहतांग-लेह सड़क को बीआरओ ने रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर बहाल कर दिया है। महज 6 दिनों के भीतर सीमा सड़क संगठन ने रोहतांग से लेकर हिमाचल की अंतिम सीमा सरचू तक करीब 200 किलोमीटर के दायरे से बर्फ हटाकर एक रिकॉर्ड स्थापित किया है। 22 से 24 सितंबर के बीच हुए हिमपात के कारण 3 से 8 फीट तक बर्फ जम गई थी।

इससे बारालाचा, सरचू, पटेसउ, जिंगजिंगबार, सूरजताल और भरतरपुर में करीब 500 सैलानी फंस गए थे। इन्हें अब हवाई और ग्राउंड रेस्क्यू ऑपरेशन से बचा लिया गया है। पूरे अभियान में बीआरओ की बड़ी भूमिका रही है। बीआरओ 70 आरसीसी के सेकंड-इन-कमांड कैप्टन मेहुल ने बताया कि बर्फ में फंसे सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाने के लिए संगठन के अधिकारियों और जवानों ने शून्य से नीचे तापमान में दिन रात बर्फ हटाने का अभियान जारी रखा।

संगठन के जवानों ने अपनी जान दांव पर लगाकर महज 6 दिनों में बर्फ से लकदक 16500 फीट ऊंचे बारालाचा समेत रोहतांग दर्रे के 200 किमी के दायरे से बर्फ हटाकर सरचू तक सड़क बहाल की है। बीआरओ की ओर से सबसे कम अवधि में इतने बड़े दायरे से बर्फ हटाने का रिकॉर्ड बना है।

अभियान में बीआरओ ने डोजर, रोलवा, स्नोकटर, जेसीबी, एस्केवेटर समेत कई जवानों को तैनात कर रखा था। सरचू मार्ग बहाल होने के बाद रविवार को सेना का काफिला दालंग ट्रांजिट कैंप से सरचू की तरफ रवाना हुआ। सड़क बहाली के साथ बीआरओ ने रेस्क्यू अभियान में भी अहम भूमिका निभाई है। बारालाचा, जिंगजिंगबार, सूरजताल, पटसेउ, रोहतांग, ग्रांफू और बातल-छोटा दड़ा में फंसे करीब 450 सैलानियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। 

काजा-छोटा दड़ा सड़क बहाल 
सीमा सड़क संगठन के 108 आरसीसी ने बर्फबारी से बंद पड़े काजा-छोटा दड़ा को बहाल कर दिया है। 108 आरसीसी के ओसी मेजर तनेह अग्रवाल ने बताया कि 759 बीआरटीएफ के कमांडर डीएस राव के नेतृत्व में इस पूरे अभियान को अंजाम दिया गया है। सड़क मार्ग बहाल होने के बाद बातल, छोटा दड़ा और चंद्रताल क्षेत्र में फंसे दर्जनों सैलानियों को सड़क मार्ग के जरिए वाया किन्नौर रेस्क्यू किया गया है। 
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