प्रदेश में पंचायतों की नई सीमाओं और आरक्षण रोस्टर को लेकर संशय बना है। प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस बारे में बने असमंजस की स्थिति खत्म होगी। आरक्षण और पुनर्सीमांकन प्रक्रिया को चुनौती देती सभी याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है और इसी के साथ ही पंचायत चुनाव का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। 15, 16 और 17 दिसंबर को नामांकन भरे जाएंगे। 18 को स्क्रूटिनी होगी और 21 को नाम वापस लिए जाएंगे। 1, 3 और 5 जनवरी को मतदान होगा। ग्राम पंचायतों के नतीजे उसी दिन आ जाएंगे। बीडीसी और जिला परिषदों के नतीजे बाद में आएंगे।
मौजूदा आरक्षण रोस्टर और पुनर्सीमांकन से तय की गई सीमाओं के भीतर चुनाव लड़ने के इच्छुक अनेक प्रत्याशी प्रचार अभियान भी शुरू कर चुके हैं और दूसरी ओर उनकी नजरें हाईकोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं। बहुत से उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जो फैसला आने के बाद ही चुनाव में कूदेंगे। हाईकोर्ट में दायर की दर्जनों याचिकाओं में से कुछ में आरक्षण प्रक्रिया को संविधान के अनुरूप नहीं बताते हुए चुनौती दी गई है।
कुछ याचिकाओं में पुनर्सीमांकन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए गए हैं। इन पर सात दिसंबर में हुई सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने मामला उच्च न्यायालय में चला होने के बावजूद अधिसूचना जारी कर दी थी। इस अधिसूचना के मुताबिक चुनाव मौजूदा ढांचे में होंगे। इससे पूर्व कोर्ट ने 26 नवंबर को हुई सुनवाई के बाद 30 नवंबर तक यथास्थिति के आदेश दिए थे।
‘हिमाचल हाईकोर्ट का जो भी फैसला आएगा, उसे राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष रखा जाएगा। उसी समय कुछ कहा जा सकता है।’ - केवल शर्मा, संयुक्त निदेशक, हिमाचल प्रदेश निर्वाचन आयोग।