यहां तक कहा गया कि जब विस के चुनाव होंगे तो आप मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी होंगे। विस चुनाव से पहले वह सुषमा से मिलने घर गए। मुलाकात के बाद घर से बाहर गाड़ी तक छोड़ने आईं।
उन्होंने कहा था ‘आज तो गाड़ी में बैठा रही हूं, इसके बाद शिमला में मुख्यमंत्री की गाड़ी में बैठे देखना चाहती हूं।’ बाद में जब अनुराग सांसद बने तो वह नेता प्रतिपक्ष थीं। फोन पर कहा ‘अनुराग मेरा संकट मोचक है।’
सुषमा हर नए सांसद को मां की ममता के रूप में बच्चे के तौर पर आगे बढ़ाती थीं। धूमल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने सुषमा स्वराज के रूप में एक महत्वपूर्ण नेता खोया है। सुषमा स्वराज सर्वमान्य नेता थीं।
धूमल ने बताया कि 1989 में वह पहली बार सांसद बने तो 1990 में सुषमा स्वराज पहली बार राज्यसभा में चुनकर आई थीं। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब पार्टी ने एक कमेटी गठित की, जिसकी अध्यक्षता सुषमा स्वराज ने की थी।
उन्हीं की अनुशंसा पर पार्टी में महिलाओं को 33 फीसदी पद पदाधिकारियों के रूप में मिलना शुरू हुए। धूमल ने कहा कि राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध रहे।