राज्य उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाते हुए की टिप्पणी, जिला आयोग के आदेश को किया संशोधित
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बीमा कंपनी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बीमा दावों के मामलों में सर्वेयर की रिपोर्ट अहम साक्ष्य होती है और बिना किसी ठोस सबूत के इसे खारिज नहीं किया जा सकता।
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग चंबा के उस फैसले को संशोधित कर दिया है, जिसमें बीमा कंपनी को दुकानदार को 8.31 लाख रुपये अतिरिक्त चुकाने के आदेश दिए थे। चंबा जिले की तहसील चुराह के गांव हिमगिरी कोठी निवासी कुबेर सिंह मैसर्स सोनी ट्रेडिंग कॉम्प्लेक्स के नाम से कपड़े, करियाना, जूते और रेडीमेड गारमेंट्स की दुकान चलाते थे। उन्होंने अपनी दुकान और स्टॉक का एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा करवा रखा था। 15-16 फरवरी 2018 की दरमियानी रात दुकान में आग लग गई जिससे सारा सामान जलकर राख हो गया। शिकायतकर्ता ने 21.71 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया था। बीमा कंपनी के सर्वेयर ने मौके का मुआयना करने के बाद नुकसान का आकलन 4,97,192.46 रुपये किया। कंपनी ने 1,132 रुपये काटकर 4,96,060 रुपये की राशि दुकानदार के खाते में भेज दी।
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दुकानदार ने नुकसान की इस राशि को बेहद कम बताते हुए जिला उपभोक्ता आयोग चंबा में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए नुकसान 13,27,900 रुपये माना। पहले से दी राशि को समायोजित करने के बाद बीमा कंपनी को शेष 8,31,840 रुपये सात प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया था। इसके अलावा 20,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च भी देने के निर्देश दिए थे। जिला आयोग के इस फैसले को बीमा कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता सर्वेयर की रिपोर्ट में कोई तकनीकी या तथ्यात्मक खामी साबित नहीं कर सका। शिकायतकर्ता ने जिन बिलों के आधार पर 13.27 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया था उन्हें साबित करने के लिए संबंधित सप्लायर्स का कोई हलफनामा तक पेश नहीं किया था। पीठ ने माना कि सर्वेयर ने खातों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही 4,97,192.46 रुपये के नुकसान का आकलन किया था। कंपनी 4,96,060 रुपये पहले ही अदा कर चुकी है, इसलिए अब केवल शेष 1,132.46 रुपये की राशि ही देय बनती है।
45 दिन के भीतर करना होगा अनुपालन
राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि कंपनी शिकायतकर्ता को शेष 1,132.46 रुपये की राशि शिकायत दायर करने की तारीख से लेकर भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज सहित अदा करें। बीमा कंपनी को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर इसका अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। हालांकि जिला आयोग की ओर से लगाए 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च के आदेश को बरकरार रखा है।