सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी जिसमें विधायकों को नगर निकायों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान करने से रोका गया था। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब राज्य के उन विधायकों को, जो नगर पालिकाओं के पदेन सदस्य हैं, नागरिक निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने की अनुमति मिल गई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए 4 जून 2026 के आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है।
पीठ ने यह आदेश हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) पर दिया है। याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिका पर विचार करते हुए पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले को 17 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, जहां भी अब तक नगर निकाय के चुनाव हुए हैं, वहां उन निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधानसभा सदस्य यानी विधायक नगर निगम मेयर-डिप्टी मेयर, नगर परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष और नगर पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए वोट देने के हकदार होंगे।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे पदाधिकारियों के चुनाव के परिणाम अंतिम रूप से हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाही के नतीजे पर निर्भर करेंगे। यानी, यदि हाईकोर्ट में लंबित मामले में कोई अलग निर्णय आता है, तो उसका प्रभाव इन चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट में आज मुख्य याचिका पर सुनवाई
यह मामला हिमाचल प्रदेश सरकार और संजय चौहान व अन्य के बीच का है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 जून को एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मुख्य याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
यह था हाईकोर्ट का आदेश
हिमाचल हाईकोर्ट ने चार जून को फैसला सुनाते हुए शहरी विकास विभाग की ओर से 13 जुलाई 2023 को जारी उस स्पष्टीकरण पर रोक लगा दी, जिसमें विधायकों को मतदान का अधिकार देने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश नगर निगमों की कार्यवाही की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार राज्य चुनाव आयोग के पास है, न कि सरकार के पास। अदालत ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धाराओं 28, 30, 31 और 32 के तहत विधायक सामान्य बैठकों और समितियों की बैठकों में भाग लेने के साथ अन्य सामान्य विषयों पर मतदान कर सकते हैं, लेकिन निकाय के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में अंतिम निर्णय का अधिकार केवल निर्वाचित सदस्यों को होगा। अदालत ने कहा था कि नगर निकाय स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं हैं। यदि विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो यह स्थानीय निकायों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप होगा।