राष्ट्रीय परियोजना घोषित रेणुका बांध परियोजना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की याचिका पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। हिमाचल सरकार ने केंद्र सरकार से 1981 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देने की मांग की है। केंद्र को हिमाचल सरकार की ओर से कई बार इस बाबत पत्र लिखे गए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। नौ जुलाई को प्रदेश सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
20 जुलाई को मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यमुना नदी पर बनने वाली इस परियोजना को लेकर साल 1994 में एमओयू हुआ था। करीब छह हजार करोड़ रुपये का परियोजना निर्माण पर खर्च आना अनुमानित है। इस खर्च का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी।
932 हेक्टेयर निजी भूमि का दिया जाना है मुआवजा
दस प्रतिशत शेयर उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल को देना है। दिल्ली को 23 क्यूमैक्स प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी दे सकने वाली 2100 हेक्टेयर भूभाग पर बनने वाली रेणुका बांध परियोजना में 932 हेक्टेयर निजी भूमि की मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए विस्थापित कोर्ट की शरण में हैं।
रेणुका बांध महाप्रबंधक वीके कौशल ने बताया कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से 1981 करोड़ की राशि जारी होनी है। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अभी जवाब दायर नहीं किया है। केंद्र सरकार ने जवाब दे दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी ने बताया है कि हिमाचल सरकार की ओर से एचपीपीसीएल ने सुप्रीम कोर्ट में एसपीएल (स्पेशल लीव पीटीशन) दायर की है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।
यह है मामला
रेणुका बांध परियोजना से दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और हरियाणा को पीने का पानी मिलना है। परियोजना से 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होना है। बिजली उत्पादन हिमाचल के हिस्से में आया है। भूमि अधिग्रहण का हिमाचल ने 1981.35 करोड़ रुपये का मुआवजा देना है। केंद्र से यह राशि जारी नहीं होने से मामला लटका हुआ है।
केंद्र सरकार से अगर इसी माह राशि नहीं मिली तो पहले से तय शर्तों के अनुसार दोबारा से भूमि अधिग्रहण करना पड़ेगा। अगर ऐसा होता है तो प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू होने में काफी समय लगेगा। प्रोजेक्ट से लाभान्वित होने वाले राज्यों को भी इस देरी का परिणाम भुगतना पड़ेगा।