रात-दिन गोलियों की आवाज। गोली शरीर को छूते-छूते निकले या दीवार से टकरा जाए। चारों तरफ का मंजर खौफनाक। यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि दक्षिणी सूडान के गृह युद्ध में फंसे सिरमौर जिले के युवक सुमित की है। दक्षिण सूडान के जुबा शहर में
सुमित ने सात दिन और सात रातें भवन के अंदर बने एक बंकर में गुजारी। खाना तो मिला लेकिन सीमित मात्रा में। शुक्रवार को एयरलिफ्ट किए गए 156 भारतीयों में सिरमौर के कालाअंब का रहने वाला सुमित भी था। परिजन उसे देख गदगद हुए। वतन वापसी पर सुमित के चेहरे पर रौनक लौट आई है।
'छह जुलाई को यूएन कार्यालय पर हुआ हमला और हम यहीं फंस गए'
सुमित चाइना की हुवाई (एचयूएडब्ल्यूईआई) टेक्नोलॉजी नामक कंपनी में टेलीकॉम इंजीनियर है। एक ग्लोबल प्रोजेक्ट के सिलसिले में कंपनी ने उसे सूडान भेजा था। 31 मई को वह सूडान पहुंचा। वह वहां पर काम करता रहा। उनके अनुसार जुबा शहर में कंपनी के कार्यालय के साथ ही यूएन का भी कार्यालय है। छह जुलाई को यहां अचानक हमला हो गया।
लिहाजा वह अपने दफ्तर से बाहर नहीं निकल सके। उन्हें भवन के भीतर बने एक बंकर में छुपाया गया। सात दिन तक लगातार युद्ध होता रहा। गालियों और धमाकों की आवाजें अब भी उनके कानों में गूंज रही हैं। उनके अनुसार उनके साथ करीब दस देशों के 50 लोग इस दौरान फंस गए। इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। हालांकि, भारत से वह चार ही लोग थे।
व्हट्सऐप आया काम
कालाअंब की एक्साइज कालोनी के रहने वाले सुमित का कहना है कि इस दौरान उनका सहारा व्हट्सऐप बना। इसी के जरिए उसकी परिजनों से चेटिंग होती रही।
हालांकि मां को इस घटना के बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार किया था। बड़े भाई मेजर अमित शर्मा से जरूर चेट हुई। इसी दौरान दूतावास से भी उनका संपर्क हुआ जिसके आधार पर उन्हें एयरलिफ्ट किया गया।
सुमित को पाकर खुश
सुमित को वापस पाकर वह खुश है। ऊपर वाले का लाख-लाख शुक्र है कि वह घर लौट आया। मुझे इस बारे में किसी ने कुछ नहीं बताया। जब सुमित दिल्ली पहुंचा तो तभी परिवार के लोगों ने यह जानकारी दी। -सुदेश शर्मा, सुमित की मां