रविवार सुबह 8:17 बजे शिमला रेलवे स्टेशन से विस्टाडोम कोच ट्रायल के लिए कालका रवाना किए गए। रेलवे स्टेशन पर पहले स्पेशल कोच की सफाई की गई। ट्रायल का निरीक्षण करने के लिए विशेष तौर पर अंबाला से रेल अधिकारी शिमला पहुंचे थे।
शिमला रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक प्रिंस सेठी ने बताया कि ट्रायल के लिए शनिवार शाम 4:40 बजे विस्टाडोम शिमला पहुंचा था, रविवार सुबह शिमला से कालका की ओर स्पेशल कोच का ट्रायल किया गया है।
विस्टाडोम कोच वातानुकूलित है। इसकी खिड़कियां मोटे पारदर्शी शीशे की हैं जो सामान्य से कहीं ज्यादा बड़ी हैं। इसकी छत भी शीशे की है। कोच का इंटीरियर भी खास तौर पर डिजाइन किया गया है।
डिब्बे के दरवाजे और खिड़कियों में कठोर शीशे का इस्तेमाल किया गया है और स्टील रेलिंग लगाई गई है। एलईडी लाइटें तथा तापमान मापक यंत्र भी लगाया गया है। कोच को वॉयलेट और सुनहरे रंगों से रंगा गया है।
विस्टाडोम कोच में रेलवे ने फाइव स्टार सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं लेकिन इस कोच में टॉयलेट नहीं है। विशेष कोच के साथ जनरेटर और स्टॉफ के लिए जोड़े जाने वाले डिब्बे में टॉयलेट की सुविधा है।
ऐसे में अगर किसी यात्री को चलती गाड़ी में टॉयलेट इस्तेमाल करना है तो उसे अगले स्टेशन पर गाड़ी रुकने का इंतजार करना होगा। इतना ही नहीं कोच में लगाई गई कांच की छत भी चिंता का विषय है। भूस्खलन की स्थिति में कोच और इसमें सवार यात्रियों को नुकसान पहुंच सकता है।