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Shimla News: छात्रों को न को समय पर प्रमाण पत्र मिल रहे न ही रिजल्ट

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एचपीयू की अकादमिक और परीक्षा शाखा में 144 पद रिक्त, कर्मचारी न होने सैकड़ों विद्यार्थियों को झेलनी पड़ रही परेशानी
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छात्रवृत्ति और दाखिले के काम भी लटक रहे
छात्रों ने पूछा, फीस देने के बावजूद क्यों झेलें परेशानी

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में प्रमाणपत्र और परीक्षा परिणाम से लेकर दाखिले तक के लिए हजारों छात्रों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विवि की अकादमिक शाखा से लेकर परीक्षा शाखा तक कर्मचारियों की भारी कमी है। दोनों शाखा में 144 पद खाली पड़े हैं।
खाली पदों में लिपिक, कार्यालय सहायक, प्रयोगशाला कर्मी, पुस्तकालय स्टाफ, तकनीकी सहायक और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े पद शामिल हैं। इन पदों पर भर्ती न होने से विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के कामकाज की रफ्तार धीमी हो गई है और छात्रों को बुनियादी सेवाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने सवाल किया कि जब वह हजारों रुपये की फीस दे रहे हैं तो फिर परेशानी क्यों झेलें।
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छात्रों को प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, दाखिले, परीक्षा परिणाम और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में फाइलें समय पर आगे नहीं बढ़ पा रही हैं जिससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कार्यालयों में पहले से तैनात कर्मचारियों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे न केवल कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा है बल्कि छात्रों और प्रशासन के बीच असंतोष की स्थिति भी बन रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि स्टाफ की कमी का सीधा असर पढ़ाई, परीक्षाओं और प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। मांग की जा रही है कि रिक्त पदों का तुरंत विज्ञापन जारी किया जाए और भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तथा पारदर्शी तरीके से पूरा करें।


परिवहन व्यवस्था की बदहाली
कैंपस और छात्रावासों से विभागों तक आने जाने के लिए बस सेवा छात्रों की मुख्य परिवहन सुविधा है, लेकिन मौजूदा समय में यह व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। पहले जहां विश्वविद्यालय के पास आठ बसें थीं, अब केवल तीन बसें ही हैं। रखरखाव की अनदेखी और समय पर मरम्मत न होने से बसों की संख्या लगातार घटती गई। इसका असर रोजाना पढ़ाई पर पड़ रहा है। छात्रों के लिए पीक ऑवर्स में भारी भीड़, लंबा इंतजार और कई बार कक्षाएं छूटना आम हो गया है। छात्राओं के लिए असुविधा और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी सामने आ रही हैं। मांग की जा रही है कि नई बसें खरीदी जाएं, पुरानी बसों की मरम्मत के लिए स्थायी व्यवस्था बने और नियमित समयसारिणी लागू की जाए।
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प्रशासन को ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी
परिवहन व्यवस्था की बदहाली और स्टाफ की कमी को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की विश्वविद्यालय इकाई ने कुल सचिव ज्ञान सागर नेगी को ज्ञापन सौंपा। एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई उपाध्यक्ष आशीष चौहान ने कहा कि यह मुद्दे पहले भी उठाए जा चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ। यदि समयबद्ध कदम नहीं उठाए गए तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा।
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