गुरुवार को सेब लेकर सोलन, परवाणू मंडी में पहुंचे कई बागवान करीब 4,000 पेटियों के साथ चंडीगढ़, पंचकूला समेत बाहरी राज्यों की अन्य मंडियों के लिए रवाना हो गए। दोनों मंडियों में सेब की कुल 5,000 पेटियां पहुंची थीं।
किलो के हिसाब से सेब बेचने के हिमाचल सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदेश सेब मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने हड़ताल रखी। इसके चलते सोलन और परवाणू की सेब मंडी में कारोबार ठप रहा। गुरुवार को सेब लेकर सोलन, परवाणू मंडी में पहुंचे कई बागवान करीब 4,000 पेटियों के साथ चंडीगढ़, पंचकूला समेत बाहरी राज्यों की अन्य मंडियों के लिए रवाना हो गए। दोनों मंडियों में सेब की कुल 5,000 पेटियां पहुंची थीं।
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जानकारी के अनुसार शिमला, करसोग, चौपाल समेत अन्य पहाड़ी क्षेत्रों से बागवान अपने सेब लेकर सोलन, परवाणू पहुंचे थे। लेकिन आढ़तियों की हड़ताल के चलते सेब की खरीद नहीं की गई। मजबूरन बागवानों को बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ा। इससे मंडी समिति समेत बागवानों को भी नुकसान उठाना पड़ा। सोलन मंडी में 1600 और परवाणू सेब मंडी में 3400 बॉक्स पहुंचे थे। वहीं परवाणू में आढ़तियों ने प्रेस वार्ता कर मांग पूरी न होने तक काम बंद रखने का निर्णय लिया है।
आढ़तियों को काम शुरू करने के लिए दो दिन का समय
उधर, मंडी समिति के सचिव डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि आढ़तियों ने काम ठप रखा है। किलो के हिसाब से सेब बेचने का निर्णय आढ़तियों के साथ बैठक कर लिया गया है। इसमें सभी आढ़तियों ने सहमति भी जताई थी। उन्होंने बताया कि आढ़तियों को काम शुरू करने के लिए दो दिन का समय दिया है। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी कर उनके लाइसेंस भी रद्द कर दिए जाएंगे। सेब मंडियों में आढ़तियों को कारोबार के लिए निशुल्क ऑक्शन शेड प्रदान किए गए हैं। वीरवार को बागवानों को बाहरी राज्यों की मंडियों में सेब बेचने पड़े हैं।