लोअर ढली, फाइव बेंच, नवबहार, तवी मोड़ से बालूगंज तक लाइटें खराब, कहीं बिल भुगतान न होने से पसरा है अंधेरा
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तेंदुए समेत अन्य जंगली जानवरों का रहता है खतरा संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। राजधानी में शाम ढलते ही कई इलाकों की सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं। स्ट्रीट लाइटें बंद होने से जहां शहरवासियों को रात में आवाजाही में परेशानी हो रही है, वहीं उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर के कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं, जबकि कुछ जगह बिल भुगतान या रिचार्ज खत्म होने के कारण लाइटें नहीं जल रही हैं। इसका सबसे अधिक खामियाजा लोअर ढली और आसपास के इलाकों में देखने को मिल रहा है। घने अंधेरे के बीच कई जगहों पर चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, चोर दुकानों के ताले तोड़कर नकदी और घरों से गहने तथा लेपटॉप तक चोरी कर चुके हैं। रात के समय पाया गया कि शहर से सटे एडवांस स्टडी से समरहिल सड़क और तवी मोड़ से बालूगंज तक लगी कई स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। यही हाल जाखू में नवबहार से फाइव बेंच, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, यूएस क्लब और घोड़ा चौकी दरगाह के पास भी है। नगर निगम के लोअर ढली वार्ड की स्थिति तो और भी खराब है।
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मशोबरा तक लगी कई स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। खास बात यह है कि इस क्षेत्र में नारी निकेतन, सीएचसी, ब्लॉक कार्यालय, वेटरनरी, राजस्व और विद्युत विभाग के कार्यालय हैं। अक्षय नेगी और दीप कुमार ने कहा कि यहां कभी स्ट्रीट लाइटें जलती हैं तो कभी कई दिनों तक बंद रहती हैं। अंधेरे के कारण चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते दिनों यहां दुकानों से करीब तीन हजार रुपये की नकदी और एक घर से गहने चोरी हुए हैं। लोगों ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, लेकिन अंधेरा होने के कारण फुटेज में चेहरों को पहचानना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा तेंदुए और लावारिस कुत्तों के हमलों का खतरा भी बना हुआ है।
अंधेरा बढ़ा तो असुरक्षा भी बढ़ी : अतुल
स्थानीय निवासी अतुल शर्मा ने कहा कि स्ट्रीट लाइटें बंद होने के बाद रात में सड़क पर निकलना सुरक्षित महसूस नहीं होता। चोरी की घटनाओं के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। अंधेरे में संदिग्ध लोगों पर नजर रखना मुश्किल होता है। प्रशासन को बंद पड़ी लाइटों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करवाना चाहिए।
डर के साए में कारोबार : सुमित
सुमित सहगल ने कहा कि दुकानों के आसपास अंधेरा रहने से व्यापारियों की चिंता बढ़ी है। चोरी की घटनाओं के बाद रात में दुकानें बंद करके घर लौटते समय भी डर बना रहता है। उनका कहना है कि स्ट्रीट लाइटें चालू होने से कम से कम आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
जंगली जानवर सामने आ जाए तो भागने तक की जगह नहीं अशोक मोदी ने कहा कि इलाका जंगल से सटा है। रात में स्ट्रीट लाइटें बंद होने के कारण रास्ते पर दूर तक दिखाई नहीं देता। जंगली जानवरों का खतरा पहले से रहता है और अंधेरे में यह खतरा और बढ़ जाता है। अकेले जाने से बच रहे हैं और कई बार समूह बनाकर निकलते हैं।
टैक्स लेते हैं तो सुविधा भी समय पर दें : संजीव संजीव गौतम ने कहा कि शहरवासियों से टैक्स लिया जाता है। ऐसे में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना नगर निगम की जिम्मेदारी है। महीनों तक स्ट्रीट लाइटें बंद रहना गंभीर लापरवाही है। चोरी और जंगली जानवरों के खतरे को देखते हुए इस समस्या का तत्काल समाधान होना चाहिए।
रिचार्ज होते ही फिर जल जाएंगी लाइटें विद्युत उपमंडल ढली के एसडीओ शुभम चौहान ने बताया कि सभी जगह स्ट्रीट लाइट की सुविधा उपलब्ध है। अगर रिचार्ज खत्म होने के कारण लाइट बंद हुई है तो बिल भुगतान के बाद वह स्वत: चालू हो जाती है।