स्वतंत्रता सेनानियों के विवाहित बेटियों और पौत्रियों को सरकारी नौकरी में दो फीसदी आरक्षण देने की बात महज कोरी घोषणा साबित हो रही है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद प्रदेश सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई अधिसूचना जारी नहीं की है।
इससे स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों में गहरा रोष है। वर्तमान में प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानियों के करीब 661 परिवार हैं। शिक्षा विभाग में जेबीटी अध्यापक, भाषा अध्यापक, शास्त्री, ड्राइंग टीचर और टीजीटी अध्यापकों के पद भरने की प्रक्रिया शुरू है।
लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को इन नौकरियों में दो फीसदी कोटे का लाभ नहीं मिल रहा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 8 फरवरी को कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानियों के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में इसकी घोषणा की थी। लेकिन घोषणा को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
उधर, हमीरपुर के मुंशी राम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय सम्मेलन में स्वतंत्रता सेनानियों के बेटियों और पौत्रियों को भी बेटों की तर्ज पर सरकारी नौकरी में दो फीसदी आरक्षण की बात कही थी। लेकिन अभी तक अधिसूचना जारी न होने से इस वर्ग में मायूसी है। उन्होंने सरकार से शीघ्र अधिसूचना जारी कर लाभ प्रदान करने की मांग की है।