समारोह में महिला आयोग के लोगो का विमोचन भी किया गया। लोगो बनाने के मंडी जिले के धर्मेंद्र को प्रथम पुरस्कार दिया गया। नरेंद्र कुमार को भी सम्मान मिला। मुख्यमंत्री ने इन्हें हिमाचली टोपी एवं नकद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित कया।
नरेंद्र कुमार ने यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में भेंट कर दी। आयोग की अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का बतौर मुख्य अतिथि स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित करके समारोह की शुरूआत की। लक्कड़ बाजार स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।
छोटा शिमला स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अजब गजब नारी सशक्तिकरण और शहरी बाल विकास की कार्यकर्ताओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर आधारित स्किट पेश किया।
समारोह में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल, एमसी की महापौर कुसुम सदरेट, राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव पायल वैद्य, आयोग की सदस्य इंदु बाला, डीसी अमित कश्यप, वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र शर्मा, एसपी ओमापति जम्वाल मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। बेटियां कई क्षेत्रों में बेटों से आगे चली गई हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है, यदि महिलाओं को अवसर प्रदान किए जाएं तो वे हर क्षेत्र उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक कानून हैं, लेकिन महिलाओं के विरुद्ध अपराध को रोकने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इसके लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि समाज की सोच को बदलना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि लड़कियों को उनके अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के प्रति शुरूआत में ही शिक्षित किया जाना चाहिए। बालिकाओं के प्रति समाज की सोच को बदलना अति आवश्यक है।
इसके अलावा आयोग की अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने कहा कि न्याय दिलाने के साथ महिलाओं को सशक्त करना भी आयोग का उद्देश्य है। वहीं इस तरह के कार्यक्रम महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में ज्ञान
प्राप्त करने के अवसर प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को अपनी ऐच्छिक निधि से 21000 रुपये देने की भी घोषणा की।