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देवसदन में झलकी जनजातीय कला संस्कृति

Sat, 21 Jun 2014 09:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
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देव सदन कुल्लू में हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय जनजातीय सम्मेलन में जनजातीय कला संस्कृति एवं भाषा पर विद्वानों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
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शनिवार को आयोजित इस जनजातीय सेमीनार के मुख्य अतिथि कुल्लू राकेश कंवर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर ब्यास संस्कृत महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना के साथ मठ के लामाओं ने भी मंत्रोच्चारण किया।

भाषा विभाग के निदेशक अरुण शर्मा ने कहा कि इस सेमीनार का मुख्य उद्देश्य अकादमी की ओर से जनजातीय इतिहास संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के संरक्षण के प्रचार-प्रसार, प्रलेखन तथा प्रकाशन के लिए प्रकाशित किए जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि सेमीनार में प्रस्तुत शोधपत्र, आलेख तथा परिचर्चा संपादन के उपरांत अकादमी की ओर से प्रकाशित किए जाने वाली पुस्तक में शामिल किए जाएंगे। प्रबुद्ध विद्वानों में एमआर ठाकुर ने जनजातीय रहन-सहन के साथ वहां की संस्कृति और भाषाओं पर प्रकाश डाला।

प्रसिद्ध इतिहासकार छेरिंग दोरजे ने प्रदेश की जनजातीय बोलियों पर प्रकाश डाला। दोरजे करीब 25 वर्ष से भाषाओं पर अध्ययन कर रहे हैं।

टशी पलजोर ने कंग्यूर, तंग्यूर तथा सुंगम पर विस्तृत जानकारी दी। जनजातीय लोक संस्कृति पर देवकन्या ठाकुर ने जनजातीय महिलाओं की समाज तथा राजनीति में भागीदारी, डॉ. सूरत राम ने जनजातीय लोक संगीत, गणेश गली ने पांगी की लोक संस्कृति और प्रकाश भारद्वाज ने गद्दी जनजातीय लोक संस्कृति पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखिका मीनाक्षी कंवर, लेखक डॉ. सूरत ठाकुर, सतीश लोप्पा, दिनेश जस्पा, लाल सिंह, दिगंबर राणा, डॉ. सीता राम सहित कई बुद्धिजीवी विद्वान मौजूद रहे। उपायुक्त कुल्लू राकेश कंवर ने भी जनजातीय संस्कृति पर प्रकाश डाला।
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