राज्य पक्षी जाजुराना का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2023 में सात नए मेहमान आए हैं, जिनमें से तीन जीवित हैं। सभी का जन्म प्राकृतिक रूप से हुआ है। वर्तमान में जाजुराना संरक्षण के विश्व के एकमात्र प्रजनन केंद्र सराहन की पक्षीशाला में अब जाजुराना की संख्या बढ़कर 46 हो गई है। इसमें 21 नर, 22 मादा और 3 जुविनाइल (बच्चे) जाजुराना है। इसमें तीन जाजुराना 14 से 16 वर्ष के भी हैं। इनका प्रजनन अप्रैल से जुलाई महीने के बीच में होता है। अंडे देने के 28 दिन बाद इससे पक्षी निकलता है।
जाजुराना प्रजनन केंद्र सराहन में जैसे-जैसे राज्य पक्षी की संख्या बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे बड़े पक्षियों को जंगल में छोड़ा जाता है। शुरुआती दौर से लेकर अब तक जंगल से पकड़कर नौ पक्षी केंद्र में लाए गए हैं। पश्चिमी जाजुराना (वेस्टर्न ट्रैगोपैन) एक दुर्लभ पहाड़ी तीतर है। नर चमकीले रंग के होते हैं, उनका चेहरा और गला नारंगी, गर्दन मैरून और शरीर सफेद धब्बों के साथ काला होता है। मादाएं भूरे धब्बों के साथ समान रूप से भूरे रंग की होती हैं। यह हिमाचल प्रदेश का राज्य पक्षी है। स्थानीय तौर पर इसे जाजुराना, प्यारा या फुलगर के नाम से जाना जाता है।
संरक्षण केंद्र की वनरक्षक काजल ने बताया कि गर्मियों के मौसम में जाजुराना 2600 से 3000 की हाईट में रहते हैं। वहीं सर्दियों में 2200 से 2300 की हाइट में आ जाते हैं। यहां मौजूद जाजुराना भोजन के लिए 90 फीसदी शाकाहारी प्रजाति है। ये कटे फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज प्रचुर मात्रा में खाते हैं।
दो बार छोड़ा गया है जाजुराना को जंगल में
अब तक यहां से दो बार पक्षियों को जंगल में छोड़ा गया है। एक साल में दो जोड़ों को उनके एक बच्चे के साथ जंगल में छोड़ा गया है। वर्ष 2023 में इन्हें जगल में छोड़ा नहीं गया, क्योंकि नए जन्मे पक्षियों की संख्या कम थी। अगर इस साल ज्यादा बच्चे जन्म लेंगे तो इन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा।
-अशोक कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सराहन