आईजीएमसी के न्यूरो सर्जरी विभाग में स्पाइनल इंजरी के ऑपरेशन शुरू हो गए हैं। इससे पहले मरीजों को स्पाइनल इंजरी के ऑपरेशन करवाने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ के अलावा बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था। बाहरी राज्यों में ऑपरेशन करवाने के लिए मरीजों की जेबों से दो से ढाई लाख तक खर्चा पहुंच जाता था।
अब आईजीएमसी में ऑपरेशन होने से मरीजों को राहत मिलेगी। अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभाग में इन दिनों तीन कंसलटेंट डॉक्टर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल में एक महीने में गर्दन से लेकर रीढ़ की हड्डी के नीचे वाली जगह में चोट लगने के कारण करीब पंद्रह से बीस मरीज आते हैं।
ज्यादातर हादसों में घायल होते हैं। अब तक अस्पताल में ऑपरेशन न होने के कारण मरीजों को बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था। विभाग के डॉक्टरों का दावा है कि अस्पताल में मरीजों का ऑपरेशन करीब 25 से 30 हजार के बीच हो जाएगा। अस्पताल में स्पाइनल इंजरी के ऑपरेशन हफ्ते में सोमवार और वीरवार को हो रहे हैं।
अस्पताल में पहली बार ऑपरेशन
न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष का कहना है कि अस्पताल में स्पाइनल इंजरी के ऑपरेशन पहली बार हो रहे हैं। अब मरीजों को बाहर न जाकर आईजीएमसी में ही ऑपरेशन हो जाएंगे। - डॉ. आरसी ठाकुर, - विभागाध्यक्ष न्यूरो सर्जरी विभाग, आईजीएमसी
स्पाइन डिस्क की माइक्रोस्कोप से सर्जरी
शिमला। अस्पताल में मौजूदा समय में स्पाइन के डिस्क की सर्जरी माइक्रोस्कोप के जरिये हो रही है। चिकित्सक हड्डी को बिना काटे ही एक इंच के चीरे से डिस्क को निकाल रहे हैं। इस तरह के ऑपरेशन होने के बाद मरीज को अस्पताल में दो दिनों के भीतर छुट्टी दे दी
जाती है। चिकित्सकों की भाषा में इसे की होल सर्जरी भी कहा जाता है। अस्पताल में इसका खर्चा पांच से दस हजार के बीच है जबकि प्राइवेट अस्पतालों में करीब एक लाख खर्चा इसमें आता है।
ये है डॉक्टरों की टीम
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी ठाकुर, सहायक प्रोफेसर डॉ. राजीव गर्ग, सहायक प्रोफेसर डॉ. जनक राज और एक जूनियर रेजिडेंट डॉ. प्रवीण भाटिया अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।