प्रदेश हाईकोर्ट ने लावारिस पशुओं के रखरखाव के लिए उचित कदम न उठाने पर मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। अदालत ने प्रधान सचिव पशुपालन और उपायुक्त कांगड़ा से भी जवाब मांगा है। विधि की पढ़ाई करने वाले छात्र बक्शदीप ने कांगड़ा के धर्मशाला में लावारिस पशुओं के आतंक का आरोप लगाया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम धर्मशाला लावारिस पशुओं के रखरखाव करने में विफल रही है।
गोशाला या स्थायी ठिकाना न होने के कारण पशुधन सड़कों पर घूमने को मजबूर है। इलाके में अभी तक न तो कोई गोशाला बनाई है और न ही लावारिस पशुओं को ठिकाना देने के लिए कोई ठोस कदम उठाए हैं। हाल ही में लावारिस बैल ने स्थानीय निवासी राजेंद्र पर हमला कर दिया था। गंभीर चोटें आने की वजह से अभी भी वह अस्पताल में भर्ती हैं। आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2014 में पारित हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना नहीं हो रही है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश भर के लावारिस पशुओं के लिए गोशाला बनाने के आदेश दिए थे।