राजनेताओं की शह पर ही हिमाचल में अवैध निर्माण हुआ है। सत्ता हासिल करने के लिए पार्टी के नेता हर बार लोगों को भवन नियमित करवाने का झांसा देते रहे हैं। अब जब राज्यपाल ने विवादित टीसीपी विधेयक को मंजूरी नहीं दी तो नेता राजभवन पहुंचने लगे हैं।
विज्ञापन
पॉलिसी की आड़ में लोगों ने अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन कर दी है। पहले जहां अवैध निर्माण का आंकड़ा 20 हजार के आसपास था, वहीं अब यह आंकड़ा 30 हजार पार कर चुका है। चार महीने के भीतर हिमाचल में करीब 8 हजार भवन मालिकों ने अवैध निर्माण किया है।
ज्यादातर मामलों में नेताओं और अफसरों से सांठ-गांठ रखने वालों ने अवैध निर्माण किया है। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों ने भवन नियमित करवाने की बात कही थी। अब जनता को मुंह दिखाने के लिए दोनों पार्टी के नेता लोगों के भवन नियमित करवाने के लिए राज्यपाल देवव्रत आचार्य पर दबाव बना रहे हैं।
विज्ञापन
इन जिलों में हुआ है सबसे ज्यादा अवैध निर्माण
राजधानी शिमला, धर्मशाला और सोलन जिले में सर्वाधिक अवैध निर्माण हुआ है। यहां जिन लोगों ने 4 मंजिला भवन का निर्माण किया था, वे भवन छह मंजिल हो गए हैं। लोगों ने ऐटिक में भी कमरे तक निकाल दिए हैं। भवनों का बेसमेंट कमजोर है।
बरसात के चलते ये भवन लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। हिमाचल पहाड़ी राज्य है। बिना इंजीनियर की सलाह से यहां कंस्ट्रक्शन नहीं की जा सकती है। जानकारों के मुताबिक 60 डिग्री एंगल पर भवनों का निर्माण किया जा सकता है। पॉलिसी की आड़ में लोगों ने खड़े पहाड़ 90 डिग्री एंगल जमीन पर भी मकान खड़े कर दिए हैं।
भारद्वाज, सुधीर के बाद धूमल पहुंचे राजभवन
लंबित संशोधित टीसीपी विधेयक को मंजूरी दिलाने की गुहार लगाने के लिए सबसे पहले भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज राजभवन पहुंचे, उसके बाद शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा और अब नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल भी भवनों को नियमित कराने के लिए राज्यपाल से मिल चुके हैं।
जन सुविधाओं का ध्यान रखने के राज्यपाल के स्टैंड की तारीफ
राज्यपाल आचार्य देवव्रत
- फोटो : फाइल फोटो
विवादित टीसीपी संशोधन विधेयक पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत के स्टैंड की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। राज्यपाल के आश्वासन को बुद्धिजीवी सराह रहे हैं। अवैध भवनों को वैध बनाने का बिल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पारित हो गया था, मगर राज्यपाल ने अभी तक इसे अपने पास रोक रखा है।
इस विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए कुछ दिन पहले उनसे सत्ता पक्ष के संबंधित महकमे के मंत्री मिले और उसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने भी भेंट की। राज्यपाल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि जन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ही इस पर फैसला होगा। फेसबुक पर एक बुद्धिजीवी का कमेंट है
अवैध भवनों को वैध करने यानी गलत को सही ठहराने वाला विधेयक महामहिम के पास रुका रहने के कारण, कुछ दिन पहले सरकारी पक्ष महामहिम से मिला। अब विपक्ष के नेता भी इसी बात को लेकर राजभवन पहुंच गए, बहुत कुछ मिलाकर कहा कि जनता ने सारे जीवन की पूंजी खर्च की है। हमें एक बिल्डर मिले तो कहने लगे - क्या विधेयक पास हो जाएगा, एक पूरी मंजिल नीचे खाली बंद की है, पास हो जाता है तो उसे खोलकर चार सेट निकलेंगे, करीब डेढ़ करोड़ बन जाएगा।
जिन लोगों ने नियम-कायदे से भवन बनाए हैं, वे इतने दुखी हैं कि कहते हैं अवैध वालों ने रास्ते ही बंद कर दिए हैं। इतनी मंजिलें बनाई हैं कि धूप और हवा ही रोक दिए हैं... सत्ताधारी और विपक्ष के फलां-फलां रसूखदारों ने बिना सेटबैक छोडे़ कई ज्यादा मंजिलें बना डाली हैं। ये सब चर्चा कॉफी हाउस से लेकर बाजार के चौराहों तक इन दिनों आम है। अब राज्यपाल ने कहा - जन सुविधाओं को ध्यान में रखकर लूंगा फैसला। असल में जन सुविधाएं तो नियमानुसार निर्माण में ही रह सकती हैं।
एंबुलेंस रोड, आम रास्ते, सीवरेज-पानी की लाइनें, बरसाती नाले, धूप, हवा आदि। नियमों को तोड़कर शहर को हमेशा के लिए बर्बाद कर देना तो जनसुविधा नहीं है। जाहिर है यह बयान सकारात्मक है...अब इस मामले पर प्रदेश की सरकार और विपक्ष की जुगलबंदी विलक्षण है। दोनों हाईकोर्ट के कथन के विपरीत सक्रिय हैं। उस बड़े बहुमत के भी खिलाफ हैं, जिन्होंने नियम-कायदे से निर्माण किया है। लोकतंत्र में यह स्थिति चिंताजनक नहीं तो क्या है!
इस कमेंट पर कई अन्य बुद्धिजीवियों के भी बयान आ रहे हैं। राजनेताओं, नौकरशाहों पर निशाना साध रहे ये बुद्धिजीवी अब राजभवन शिमला पर ही नजरें गड़ाए हैं कि जो भी फैसला होगा, वह उचित ही होगा। बहुत लोग इन कमेंट को लाइक भी कर रहे हैं।