अब किसानों को अपने खेतों को सींचने के लिए बारिश या आईपीएच की योजनाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सौर सिंचाई योजना के तहत सामुदायिक स्तर पर 100 फीसदी सरकारी सब्सिडी से सिंचाई योजना बनाकर किसान अपने खेतों में फसलें लहलहा सकते हैं। यही नहीं गांव का कोई भी किसान अपने मोबाइल सेट से इस योजना को संचालित करके मालामाल हो सकता है।
मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल के नगारवीं-बारी गांव के किसानों ने इस आधुनिक व्यवस्था की सफल शुरूआत कर दी है। यहां सामुदायिक स्तर पर तैयार सिंचाई योजना से जुड़कर लोग अपने स्मार्ट फोन से सिंचाई कर रहे हैं। पहले सिंचाई के लिए गांव में काफी समस्या पेश आती थी। समय पर अच्छी बारिश न होने से बहुत से किसानों की फसल खराब हो जाती थी।
इस तरह मोबाइल से होता है कार्य
सिंचाई के कंट्रोल पैनल को सिम से संचालित किया गया है। सिंचाई योजना से जुड़े लोगों के फोन को खास तरह के साफ्टवेयर से लैस किया गया है। इस फोन के माध्यम से सिंचाई योजना को लोग शुरू कर सकते हैं और उसे बंद भी कर सकता है। सोलन के नौणी विवि में निजी कंपनी ने इस तकनीक पर काम किया है लेकिन सरकारी स्तर पर किसानों ने यह तकनीक पहली बार प्रयोग में लाई है।
इस तरह उम्मीदों को लगे पंख
नगारवीं-बारी कृषक विकास संघ के प्रधान मनोज कुमार बताते हैं कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत नगारवीं-बारी में बल्ली नाले पर करीब 24 लाख रुपये से चैकडैम बनाया गया। मार्च 2019 में बन कर तैयार हुए डैम से पानी उठाने के लिए जुलाई में सौर सिंचाई योजना के अंतर्गत 8.67 लाख रुपये से 10 हॉर्स पावर का सोलर सिस्टम लगाया गया। भंडारण एवं वितरण के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत गांव में 22 हजार लीटर क्षमता का सीमेंटेड टैंक बनाया। इसके बाद 16 वितरण चैंबर बनाए गए।
यह उठा सकते हैं लाभ
कृषि विभाग मंडी के उपनिदेशक जीत सिंह बताते हैं कि राज्य के सभी किसान योजना का लाभ लेने के पात्र हैं। इसके लिए अपने इलाके के भू-संरक्षण अधिकारी या कृषि विकास अधिकारी अथवा कृषि विभाग के उपनिदेशक कार्यालय में आवेदन किया जा सकता है।
बिजली बिल के झंझट से भी राहत
जिलाधीश ऋग्वेद ठाकुर का कहना है कि सौर सिंचाई योजना से किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा की व्यवस्था मिल रही है। पानी उठाने के लिए लगाई मोटर के बिजली बिल के झंझट से भी छुटकारा मिला है। इसे फोन से संचालित किया जाता है।