प्रदेश में वन क्षेत्र का दायरा कम होने लगा है। वन कटान के साथ भूमि कटाव और भूस्खलन से वनों का क्षेत्रफल घटने लगा है। किन्नौर जिला का वन क्षेत्र का दायरा 3.2 प्रतिशत घट गया है। यह पर्यावरण के साथ वन विभाग के लिए चिंता का विषय है।
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमायली पर्यावरण शोध संस्थान मौहल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जेसी कुनियाल के शोध में इसका खुलासा हुआ है। सेटेलाइट इमेेजरी के आधार पर किए गए इस शोध में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किन्नौर जिला में भूमि कटाव से 20.26 वर्ग किलोमीटर की वन भूमि को नुकसान पहुंचा है।
जबकि भूस्खलन से 2.09 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र कम हुआ है। डा. कुनियाल ने यह शोध कार्य वर्ष 2005 से 2015 के बीच किया है। इसके क्या कारण रहे, इस दिशा में भी संस्थान के वैज्ञानिकों का शोध कार्य जारी है।
किन्नौर जिला में वनभूमि का कुल क्षेत्रफल 630.54 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 22.35 वर्ग किलोमीटर कम हुआ है। उन्होंने कहा कि वनों का कम होना न वनों के संरक्षण के लिए और न ही पर्यावरण के दृष्टि से। वनों के संरक्षण में जीवी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान भी काम कर रहा है।
वन क्षेत्र के घट रहे दायरे को रोकने के लिए प्रदेश सरकार के साथ स्थानीय लोगों को भी पहल करने की जरूरत है। जो वन भूमि कटाव या भूस्खलन से सिकुड़ रही, उसके संरक्षण के लिए पौधरोपण व घास लगाने की आवश्यकता है। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. कुनियाल ने कहा कि संस्थान पर इसके लिए काम कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।