मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (फाइल फोटो)
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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण में जुटे ठेकेदारों ने साल 2017 से एनएचएआई के पास फंसे पैसे के भुगतान के लिए शिमला में प्रदेश सचिवालय के बाहर धरना दिया। उसके बाद ठेकेदार यूनियनों ने सीएम को इस पैसे की भरपाई करवाने के लिए ज्ञापन सौंपा। ठेकेदारों ने कहा कि अगर भुगतान नहीं किया गया तो ठेकेदार निर्माणाधीन फोरलेन का कार्य शुरू नहीं होने देंगे चाहे उसके लिए हमें किसी भी स्तर के संघर्ष पर क्यों न जाना पड़े।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र चंदेल और जिला अध्यक्ष विवेक कुमार ने बताया कि उक्त फोरलेन का कार्य 2013 से 2017 तक चलता रहा। इसमें सभी ठेकेदारों ने आईएलएंडएफएस कंपनी के साथ काम किया था। 2017 के बाद कंपनी ने कार्य बंद कर दिया तथा सब ठेकेदारों का लगभग 60 करोड़ रुपये की अदायगी का भुगतान नहीं किया गया।
बताया कि एनएचएआई व आईएलएंडएफएस कंपनी के बीच में समझौता हुआ था, जिसमें एनएचएआई ने 700 करोड़ रुपये आईएलएंडएफएस को देने की बात स्वीकार की है। आईएलएंडएफएस के अधिकारी चाहते हैं कि जो पैसा एनएचएआई से उनको मिलना है, उसमें ठेकेदारों की लंबित अदायगी का भुगतान कर दिया जाए।
ठेकेदारों ने कहा कि वह और उनके परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं तथा बैंक के अधिकारी हमारी मशीनरी एवं संपत्ति को नीलाम करने के नोटिस भेज रहे हैं। इस मानसिक प्रताड़ना के चलते कुछ लोग तो आत्मदाह करने की बात कह रहे हैं।