शुरुआती जांच के मुताबिक ठेकेदारों को पानी के टैंकरों के बिलों का भुगतान करने से पहले जिला प्रशासन ने संबंधित उपमंडल अधिकारी को दस्तावेजों की वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके पानी के टैंकरों के बिलों के भुगतान को लेकर गड़बड़ी सामने आई। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि मतियाना और कसुम्पटी डिवीजन के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंताओं को बिलों के दस्तावेजों के सत्यापन का कार्य सौंपा था।
इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही उपमंडल अधिकारी ने ठेकेदारों को एक करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया। वहीं जिला प्रशासन के अधिकारी ने बताया कि जिले के उपमंडल अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह उपरोक्त धनराशि का उपयोग सूखाग्रस्त क्षेत्रों में तैनात पानी के टैंकरों के बिलों का भुगतान करने के लिए करें। इसके बाद सभी औपचारिकताएं पूरी करें। इसके अलावा किसी भी विसंगति से बचने के लिए भुगतानकर्ता को भुगतान करने से पहले ऐसे सभी बिलों का एसडीएम स्तर पर सत्यापन करने के निर्देश थे। वहीं, एसडीएम ठियोग मुकेश शर्मा ने बताया कि जल शक्ति विभाग की सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही बिलों का भुगतान किया था। बताया कि जांच अधिकारी को जल्द की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
यह है पूरा मामला
आईटीआई में सूचना लेने पर खुलासा हुआ था कि टैंकरों के नाम पर जिन वाहनों के नंबर दिए गए उनमें मोटरसाइकिल एवं कारों के अलावा एक अफसर की गाड़ी भी शामिल है। दो ऐसे गावों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति दर्शाई गई जहां पर सड़क ही नहीं है। इसके अलावा जिस पिकअप का नंबर टैंकर के नाम पर दिखा गया उससे एक दिन में 819 किलोमीटर सप्लाई दर्शाई है। दूसरे दिन भी उसी से 614 किलोमीटर सप्लाई दी गई। ठियोग के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने इस मामले की शिकायत सरकार को दी है। उन्होंने मुख्य सचिव से मामले से जुड़ा रिकार्ड सीज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।