गिरि नदी के तेज बहाव के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चों को प्रबंधन ने आॅनलाइन पढ़ाने का फैसला लिया है। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप भी तैयार कर दिए हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब तक गिरि नदी का जलस्तर कम नहीं हो जाता, तब तक शिक्षक बच्चों को आॅनलाइन माध्यम से पढ़ाएंगे।
दरअसल, काले पानी की सजा काट रहे छछेती पंचायत के क्यारी गांव के ग्रामीण शेष दुनिया से पूरी तरह कटे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चे उठा रहे हैं, जो एक तरफ उफनती गिरि नदी के बीच अकेले स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। दूसरी तरफ पहाड़ है, जहां रास्ते का नामोनिशान मिट चुका है। पढ़ाई प्रभावित न हों, इसके लिए कुछ बच्चे अपने रिश्तेदारी में रहने को मजबूर हो गए हैं।
आॅनलाइन पढ़ाने के दिए हैं आदेश : प्रधानाचार्य
क्यारी गांव के छह बच्चे नदी पार कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शडियार में पढ़ रहे हैं। इस गांव के जमा एक में पढ़ने वाले सुरजन और नवीं कक्षा की अंजली शडियार में अपनी नानी के घर रह रहे हैं। जबकि, कार्तिक(छठी), तमन्ना (10वीं), अभिषेक (8वीं) और ईशा(10वीं) साथ लगते भजौन में अपने रिश्तेदारी में ठहरे हैं। इन सभी बच्चों को स्कूल प्रबंधन ने आॅनलाइन पढ़ाने का फैसला लिया है।
वहीं, दूसरी ओर क्यारी से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुडला खरक स्कूल में पढ़ने वाली रिभा (10), विभा (जमा दो), राशि (जमा दो), शिवम (7वीं) कार्तिक (7वीं), तमन्ना (10वीं) और तृप्ति (6वीं) भी अपने रिश्तेदारों के घर रह रहे हैं, जिन्हें पहाड़ पर चढ़कर स्कूल जाना पड़ता आ रहा है।
उधर, इस बारे में शडियार स्कूल के प्रधानाचार्य देवानंद तोमर ने बताया कि सभी अध्यापकों को इन बच्चों को आॅनलाइन पढ़ाने के आदेश दिए हैं, जब तक नदी का पानी कम नहीं हो जाता। फिलहाल शनिवार को कुछ बच्चे स्कूल पहुंचे थे। फिर भी उन्हें आनलाइन पढ़ाने की बात कही है।
शनिवार को कुछ बच्चे उफनती नदी पार कर गांव पहुंचे
रविवार को अवकाश होने के चलते शनिवार को कुछ बच्चे उफनती नदी पार कर क्यारी गांव पहुंचे। छुट्टी होते ही अभिभावक बच्चों को लेने के लिए पहुंच गए थे। अभिभावकों ने बच्चों को नदी पार शडियार से क्यारी पहुंचाया