बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान विनोद का पालतू कुत्ता अपनों की तलाश करता दिखा। उसकी निगाहें अपने मालिकों को ढूंढ रही थीं। कभी दलदल की तरफ भागता को कभी मलबे से साथ बहकर आए पत्थर पर चढ़कर उन्हें ढूंढने का प्रयास करता। विनोद के परिवार में अब कुत्ता और एक भैंस बची है। बाकि, गोशाला के भीतर बंधे आधा दर्जन मवेशी भी जिंदा दफन हो गए। बताया जा रहा है कि भैंस ट्रैक्टर ट्राली के साथ बंधी थी, जो इस सैलाब से बच गई।
इस घटना के बीच सिरमौर ताल के 70 लोग रात को ही अपना घर छोड़ सड़क की तरफ निकले। जंगल में बादल फटने की आवाज और भारी बाढ़ के शोर के बीच ग्रामीणों ने इन लोगों को रेस्क्यू किया। इसके बाद इन लोगों ने पूरी रात निरंकारी भवन में काटी। यहां के कांशीराम का मकान भी बाल-बाल बच गया, जिनके आंगन तक मलबा भर गया था। इस परिवार के पांच और रिश्तेदारी से पहुंचे दो लोग हादसे के डर से रात को ही सुरक्षित स्थान पर चले गए थे।
मुगलावाला पंचायत की प्रधान प्रेमा देवी ने बताया कि ताल गांव में 13 परिवार रहते हैं, जिनमें से एक घर का नामोनिशान मिट गया है। उन्होंने कहा कि शेष परिवार भी हमेशा खतरे से साये में रह रहे हैं। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की कि इन परिवारों को किसी दूसरी जगह बसाया जाए। ताल गांव में पहाड़ी से चार खड्डों का पानी बहकर आता है। पहले भी उफान पर आए खड्ड ताल गांव को नुकसान पहुंचा चुके हैं।
ताल गांव में रह रहे एक दर्जन परिवारों की 50 बीघा उपजाऊ जमीन बर्बाद हो गई है। यहां चारों तरफ मलबा, पत्थर और जंगल से टूट कर आए पेड़ ही नजर आ रहे हैं। यहां कई लोगों के मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। इस मंजर के बाद लोगों के खेत खलिहान सब खत्म हो गए हैं।