जोर-शोर से बजता बैंडबाजा, डीजे, फिल्मी गानों की धुनों पर नाचते-थिरकते लोग और शान से चलती बरात। शादियों का यह आम नजारा है। इसके बिना शादी अधूरी सी मानी जाती है, लेकिन अब बनेठी पंचायत के बोहल गांव में सभी शादियां बैंडबाजे और डीजे के बिना ही होंगी।
शादी समारोह में बीड़ी-सिगरेट और शराब पीने पर भी रोक लगा दी गई है। यह फैसला इस गांव पर किसी ने थोपा नहीं है बल्कि खुद गांववालों ने यह अनूठी पहल की है। गांववालों ने सोमवार को सामूहिक बैठक कर यह फैसला लिया है। फैसले की लिखित कॉपी बाकायदा जिला प्रशासन और पंचायत प्रधान को सौंपी गई है।
नहीं माने तो वसूला जाएगा जुर्माना
सामूहिक बैठक में तय किया गया है कि शादी समारोहों में फिजूलखर्ची नहीं की जाएगी। डीजे, बैंड, शराब, बीड़ी-सिगरेट पर होने वाले खर्च को रोका जाएगा। इस राशि को गांव की गरीब लड़की या लड़के की शादी में इस्तेमाल किया जाएगा। यही नहीं, इलाके में चल रही शराब की अवैध दुकानों को बंद कराया जाएगा।
मनमानी करने वालों से 200 से 500 रुपये तक जुर्माना वसूला जाएगा। ग्रामीण फते सिंह, रविंद्र सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, मनोहर सिंह, बाबूराम, राम सिंह, रमेश कुमार, राजीव सिंह, रतन सिंह, रामस्वरूप, विकास ठाकुर, सूरज प्रकाश, अनिल ठाकुर, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने और शादी समारोहों में बढ़ रहे अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए लिया फैसला
इससे न केवल नशाखोरी रुकेगी बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी बचाया जा सकेगा। बताया कि शादी समारोहों में अब डीजे की जगह शहनाई, नगाड़े और पहाड़ी लोक वाद्ययंत्र बजाए जाएंगे। पंचायत प्रधान ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि फैसले की कॉपी मिली है। यह एक मिसाल है। इसे पूरी पंचायत में लागू करने की कोशिश की जाएगी।
गौर हो कि दो दिन पहले ही हिमाचल के जिला हमीरपुर के बड़सर के लोगों ने एक नई पहल की है। यहां अब शादी समारोह में खाना खाने के बाद रिश्तेदारों को घर ले जाने के लिए भोजन नहीं मिलेगा। इससे शादी समारोह का खर्चा घटेगा। वहीं अन्न भी बचेगा। पंचायत की ग्राम सभा में यह निर्णय लिया है।