कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीराम चंद्र चौदह वर्ष के वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। इसी ऐतिहासिक दिन की खुशी में शहर भर के लोग दीपक जलाकर इस त्योहार को खुशी से मनाते हैं।
हनुमान मंदिर केल्टी के पुजारी पंडित संजय शास्त्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के अप्पर शिमला में लोग दीपावली की रात को देव स्थान पर एकत्र होते हैं। इस स्थान पर लोगों द्वारा आग में दीये, खील व बताशे को आग में डाला जाता है। प्राचीन समय में ठियोग और चौपाल इत्यादि क्षेत्रों में लोग दीपावली के दिन इकट्ठे होकर लकड़ियों को जलाते थे जिसे कि पहाड़ी भाषा में मटरेना कहा जाता था।
इस दौरान लोग जोड़ी बनाकर नगाड़े की धुन पर हनुमान कथा का गान करते थे। पहाड़ी भाषा में लोग, देयला मेरेया हनुआ पुत, लायला मेरेया सिया रा पता आदि गीत गाते हैं। दीपावली को पहाड़ी भाषा में इसे दैली भी कहा जाता है। हनुमान जयंती पर मंगलवार को हनुमान मंदिर केल्टी में मंदिर प्रबंधन की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में काफी संख्या में लोगों ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई और भगवान का प्रसाद ग्रहण किया।
हनुमान मंदिर केल्टी के पुजारी पंडित संजय शास्त्री ने बताया कि बुधवार को स्वाती नक्षत्र में लक्ष्मी पूजन के लिए मंडप स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से आरंभ होकर 1 बजकर 34 मिनट तक होगा। सांयकाल में पूजन का मुहूर्त 5 बजकर 43 मिनट से लेकर रात 7 बजकर 38 मिनट के मध्य वक्र लग्न (स्थिर लग्न) में पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।