प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पेशल जज ऊना को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि ऐसे क्या कारण रहे कि उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम के तहत आने वाले आरोप के लिए गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने के लिए बाध्य होना पड़ा।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने सरकार की ओर से स्पेशल जज द्वारा पारित फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। राज्य सरकार की ओर से अपनी याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम से जुड़े आरोप के लिए अग्रिम जमानत देने का प्रावधान नहीं बनाया गया है।
इस तरह के मामलों के लिए आरोपी को पहले पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ता है। उसके बाद ही आरोपी जमानत के लिए वह आवेदन कर सकता है। इस मामले पर आगामी सुनवाई 10 मई को होगी।