आलू बीज के उत्पादन में विख्यात लाहौल घाटी के किसानों को बीज नहीं मिल रहा है। लाहौल के हजारों किसानों को करीब एक हजार क्विंटल आलू बीज की जरूरत रहती है। कृषि विभाग के पास मात्र 289 क्विंटल बीज ही उपलब्ध हो पाया है। लाहौल में ज्योति और चंद्रमुखी के अलावा संताना आलू की बिजाई जोरों पर चली है और किसान लगातार एलपीएस से आलू के बीज के लिए संपर्क साध रहे हैं।
आलू बीज के उत्पादन में विख्यात लाहौल घाटी के किसानों को बीज नहीं मिल रहा है। लाहौल के हजारों किसानों को करीब एक हजार क्विंटल आलू बीज की जरूरत रहती है। कृषि विभाग के पास मात्र 289 क्विंटल बीज ही उपलब्ध हो पाया है। लाहौल में ज्योति और चंद्रमुखी के अलावा संताना आलू की बिजाई जोरों पर चली है और किसान लगातार एलपीएस से आलू के बीज के लिए संपर्क साध रहे हैं।
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लाहौल के किसानों को बीज आलू के लिए ब्रीडर सीड कृषि विभाग उपलब्ध करवाता आया है। हालांकि कुछ साल पूर्व एलपीएस भी कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को ब्रीडर सीड उपलब्ध करवाता है, लेकिन पिछले कुछ सालों से किसानों को मांग के मुताबिक ब्रीडर सीड उपलब्ध नहीं हो रहा है। लाहौल के बीज आलू की मांग पूरे देशभर में रहती है। एलपीएस के चेयरमैन सुदर्शन जस्पा ने कहा कि लाहौल आलू बीज पर पंजाब की कुछ कंपनियों का कब्जा हो गया है। ऐसे में किसानों को बेहद कम ब्रीडर सीड उपलब्ध करवाया जा रहा है और आज स्थिति ऐसी है कि लोगों के पास बिजाई करने के लिए बीज ही नहीं है।
पिछले साल मई में एलपीएस ने 600 से अधिक क्विंटल ब्रीडर सीड की डिमांड की थी और इसी विषय को लेकर उन्होंने कृषि विभाग की सचिव निशा सिंह तथा विशेष सचिव कृषि विभाग राकेश कंवर से उठाया था और आश्वस्त किया था कि ब्रीडर सीड की कमी किसानों को नहीं होने दी जाएगी। मगर एलपीएस को कुफरी ज्योति और कुफरी चंद्रमुखी की एक भी बोरी ब्रीडर सीड उपलब्ध नहीं हो सका। लाहौल के आलू उत्पादकों का अग्रणी संगठन होने के नाते एलपीएस किसानों का नेतृत्व करने के लिए सदैव तत्पर रहेगी। लाहौल-स्पीति के जिला कृषि अधिकारी डॉ. चौधरी राम ने कहा कि विभाग ने 752 क्विंटल बीज की मांग भेजी थी। मगर उन्हें 278 क्विंटल आलू बीज मिला है।
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आलू की सालाना एक ढाई लाख बोरी की मांग
देशभर में लाहौल आलू की सालाना एक ढाई लाख बोरी की मांग रहती है। इसमें एक लाख योति और चंद्रमुखी किस्मों की और करीब डेढ़ लाख बोरी बीज संताना की रहती है। मगर किसान देशभर की मांग 50 प्रतिशत आलू बीज को उपलब्ध नहीं कर पा रहा है। जबकि पिछले कुछ सालों से कुफरी ज्योति और कुफरी चंद्रमुखी 2000 रूपये बोरी बिक रहा है। ऐसे में अब किसानों का रुझान कुफरी ज्योति व कुफरी चंद्रमुखी की ओर बढ़ रहा है।