करसोग (मंडी)। लोगों को बीड़ी, सिगरेट और अन्य नशीले तंबाकू पदार्थों से बचाने के लिए स्वास्थ्य प्रशासन अब कड़े कदम उठाने जा रहा है। युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। करसोग उपमंडल में अब कोई भी सिंगल सिगरेट नहीं बेच पाएगा। बिना लाइसेंस तंबाकू पदार्थ बेचना पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। इस अभियान की शुरुआत करसोग से की जा रही है।
प्रदेश सरकार ने इसके लिए वर्ष 2016 में कानून बनाया था, लेकिन यह कानून अब तक जमीनी स्तर पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। इस संबंध में बीते 14 अगस्त को करसोग में खंड विकास अधिकारियों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया और विस्तृत कार्य योजना बनाई है। तंबाकू बेचने का लाइसेंस केवल पंचायत सचिव और नगर पंचायत की ओर से उन्हीं लोगों को दिया जाएगा, जो तंबाकू नियंत्रण कानून 2003 का पूर्ण पालन करेंगे।
इस कानून के तहत शिक्षण संस्थानों के 100 गज/मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का तंबाकू पदार्थ बेचना प्रतिबंधित है। बच्चों को तंबाकू पदार्थ बेचना अपराध है। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पूरी तरह निषेध है तथा तंबाकू के विज्ञापन पर रोक है। बिना चेतावनी लिखे तंबाकू उत्पाद बेचना भी कानून का उल्लंघन है। तंबाकू नियंत्रण कानून 2003 के उल्लंघन पर एक हजार से 10 हजार जुर्माना तथा 5 वर्ष की कैद का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से 2016 में बनाए गए कानून के उल्लंघन पर 15 हजार से एक लाख रुपये जुर्माना और एक वर्ष कैद का प्रावधान है।
बीएमओ डॉ. गोपाल चौहान ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2016 में बने इस कानून को अब धरातल पर कड़ाई से लागू किया जाएगा। बीएमओ ने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया हैं कि वे न केवल स्वयं नशे से दूर रहें, बल्कि बच्चों और युवाओं को भी इस अभिशाप से बचाने में प्रशासन का सहयोग करें। संवाद