महिला को टूटा सामान भेजकर महीनों तक नहीं किया वापस
रुचि सांख्यान
शिमला। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट को ग्राहक को टूटा हुआ सूटकेस भेजना और रिटर्न रिक्वेस्ट मंजूर करने के बावजूद उसे वापस न लेना महंगा पड़ गया।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार-व्यवहार का दोषी पाते हुए फ्लिपकार्ट को 15 हजार रुपये का हर्जाना उपभोक्ता को देने का आदेश दिया है। इसके साथ कंपनी को सूटकेस की मूल राशि 1,241 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने सुनाया है। तारादेवी निवासी कुंता ठाकुर ने 16 दिसंबर 2025 को फ्लिपकार्ट से 1,241 रुपये का ऑनलाइन भुगतान कर सफारी कंपनी का 22 इंच का केबिन सूटकेस ऑर्डर किया था। 23 दिसंबर 2025 को जब पार्सल की डिलीवरी मिली और उसे खोला तो सूटकेस टूटा हुआ निकला। शिकायतकर्ता ने उसी दिन कंपनी को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिये इसकी शिकायत दर्ज करवाई।
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फ्लिपकार्ट ने 22 जनवरी 2026 को रिटर्न रिक्वेस्ट को मंजूरी दे दी और सामान वापस लेने का आश्वासन दिया लेकिन इसके बावजूद करीब पांच महीने तक कंपनी की ओर से कोई भी कर्मचारी सामान उठाने नहीं पहुंचा। बार-बार झूठे आश्वासन मिलने से परेशान होकर महिला ने कानूनी नोटिस भेजा लेकिन कंपनी ने उसका भी कोई समाधान नहीं किया जिसके बाद पीड़िता ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
नोटिस पर भी हाजिर नहीं हुई कंपनी
शिकायत स्वीकार होने के बाद आयोग ने फ्लिपकार्ट को नोटिस जारी किया लेकिन समन मिलने के बाद भी कंपनी की तरफ से न तो कोई प्रतिनिधि पेश हुआ और न ही कोई वकील उपस्थित हुआ। इस पर आयोग ने 8 जुलाई 2026 को कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई। शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए गए भुगतान प्रमाण, चैट रिकॉर्ड और क्षतिग्रस्त सूटकेस की तस्वीरों के आधार पर आरोप पूरी तरह साबित पाए गए।