शिमला जिला परिषद के चेयरमैन पद पर भोपेंद्र सिसोदिया ने 13 वोट लेकर जीत दर्ज की। सुरेंद्र रेटका को 10 वोट मिले और दो मत रिजेक्ट हुए। वाइस चेयरमैन पद पर निर्दलीय भरत सिंह क्लांटा ने 14 वोट लेकर मीनाक्षी को हराया। क्लांटा ने भाजपा को समर्थन दिया था और भाजपा ने उन्हें वाइस चेयरमैन पद के लिए समर्थन दिया। इस जीत के साथ 26 साल बाद भाजपा ने शिमला जिला परिषद की सत्ता हासिल की।
शिमला जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन पद के चुनाव में भाजपा ने 26 साल बाद जिला परिषद की सत्ता अपने नाम कर ली है। अध्यक्ष पद पर भोपेंद्र सिसोदिया ने जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा वाइस चेयरमैन चुने गए। क्लांटा ने चुनाव में भाजपा को समर्थन दिया था। इसके बाद भाजपा ने उन्हें वाइस चेयरमैन पद के लिए समर्थन देकर जिला परिषद में सत्ता का समीकरण अपने पक्ष में कर लिया। अध्यक्ष पद के चुनाव में भोपेंद्र सिसोदिया को 13 वोट मिले, जबकि कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र रेटका को 10 मत प्राप्त हुए। इस दौरान दो मत रिजेक्ट हुए। 13 वोट के साथ सिसोदिया ने अध्यक्ष पद के लिए जरूरी बहुमत हासिल कर लिया और जीत दर्ज की।
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वहीं वाइस चेयरमैन पद का मुकाबला भी दिलचस्प रहा। निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा को 14 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी मीनाक्षी को 10 मत प्राप्त हुए। एक मत रिजेक्ट हुआ। क्लांटा की जीत के साथ ही भाजपा समर्थित खेमे को जिला परिषद में दूसरा बड़ा पद भी मिल गया।
इस चुनाव की सबसे अहम बात यह रही कि भरत सिंह क्लांटा निर्दलीय सदस्य के तौर पर चुनाव जीते थे और उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया था। अब भाजपा ने उन्हें वाइस चेयरमैन पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इस तरह निर्दलीय सदस्य का समर्थन भाजपा के लिए जिला परिषद में सत्ता हासिल करने में निर्णायक साबित हुआ।
25 सदस्यीय शिमला जिला परिषद में चुनाव से पहले किसी भी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था। भाजपा के पास 11 और कांग्रेस के पास 10 सदस्य थे, जबकि निर्दलीय सदस्यों की भूमिका किंगमेकर के तौर पर सामने आई। अध्यक्ष पद के लिए 13 मतों का आंकड़ा जरूरी था। भोपेंद्र सिसोदिया ने 13 वोट हासिल कर भाजपा को स्पष्ट बढ़त दिला दी।
वाइस चेयरमैन पद पर 14 वोट मिलने से भाजपा समर्थित खेमे की स्थिति और मजबूत हो गई। चुनाव परिणाम घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। जिला परिषद परिसर में समर्थकों ने नारेबाजी की और जीत का जश्न मनाया।
शिमला जिला परिषद के लिए यह चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि करीब 26 साल बाद भाजपा को जिला परिषद की कमान मिली है। लंबे समय से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान का आखिरकार पटाक्षेप हो गया।
अब भोपेंद्र सिसोदिया के नेतृत्व में जिला परिषद का कामकाज आगे बढ़ेगा, जबकि भरत सिंह क्लांटा उपाध्यक्ष के रूप में उनका साथ देंगे। दोनों पदों पर नए नेतृत्व के साथ जिला परिषद में विकास कार्यों और लंबित मुद्दों को गति देने की चुनौती भी होगी।
कुल मिलाकर शिमला जिला परिषद के चुनाव में भाजपा ने अध्यक्ष पद अपने नाम किया, जबकि निर्दलीय सदस्य भरत सिंह क्लांटा का समर्थन हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर भी अपना प्रभाव कायम कर लिया।
जयराम ठाकुर का सरकार पर हमला, बोले- यह लोकतंत्र की जीत
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित खेमे की जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने भोपेंद्र सिंह सिसोदिया के अध्यक्ष और निर्दलीय सदस्य भरत सिंह कलांटा के उपाध्यक्ष चुने जाने पर दोनों को बधाई दी। साथ ही चुनाव परिणाम को लोकतंत्र की जीत बताया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि शिमला जिला परिषद के चुनाव परिणाम ने उन लोगों को जवाब दिया है, जो कथित तौर पर सत्ता के प्रभाव और सरकारी मशीनरी के सहारे जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। उनके अनुसार सरकार की ओर से कई तरह के प्रयास किए गए, लेकिन निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपना फैसला सुना दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिला परिषद का परिणाम लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई, लेकिन ये प्रयास सफल नहीं हुए। जयराम ठाकुर के मुताबिक जनप्रतिनिधियों ने मतदान के जरिए इसका जवाब दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनाव परिणाम से सबक लेने की नसीहत भी दी। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार को लोकतंत्र, संविधान और जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिक दबाव में लाने के बजाय जनता की भावनाओं और जनादेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।