कांग्रेस टालती रही चुनाव, लेकिन जीत पक्की थी : भोपेंद्र
इस जीत के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व समेत स्थानीय विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जनता व सदस्यों का अहम योगदान रहा है। कांग्रेस इस चुनाव को काफी दिन से टाल रही थी। आज जब चुनाव हुआ तो सबको पता चल गया कि बहुमत और जनता किसके साथ है। अब मिलकर काम करेंगे। जनता को सुविधाएं देने वाले काम धरातल पर उतारेंगे।-भोपेंद्र, अध्यक्ष जिला परिषद शिमला।
कांग्रेस के गढ़ में खिला कमल
शिमला जिला में साल 2000 में भाजपा ने आखिरी बार जिला परिषद चुनाव जीता था। उसके बाद से कांग्रेस का दबदबा रहा है। विधानसभा चुनावों में भी जिला की आठ सीटों में से सात पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है। जिला में कांग्रेस के तीन मंत्री हैं। इसके बावजूद जिला परिषद चुनाव में पार्टी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। भाजपा इसे बड़ी जीत मान रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि इस चुनाव में भाजपा को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। दावा है कि उपाध्यक्ष चुने गए भरत सिंह कलांटा पहले कांग्रेस पृष्ठभूमि के रहे हैं और वह निर्दलीय चुनाव जीते। हालांकि, पार्टी उन्हें अपने खेमे में नहीं ले पाई।
भाजपा ने मनाया जीत का जश्न, डीसी ऑफिस से बाजार तक निकाली रैली
वहीं जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए उपायुक्त कार्यालय परिसर में वीरवार सुबह 10:00 बजे से ही लोगों का जमावड़ा लग गया था। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच बचत भवन में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए उपायुक्त अनुपम कश्यप समेत अन्य अधिकारी पहुंचे। इसी दौरान कांग्रेस और भाजपा जिला परिषद सदस्य अपने अपने नेताओं के साथ बचत भवन पहुंचे। कांग्रेस सदस्य ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अगुवाई में पहुंचे थे। वहीं, भाजपा सदस्य सांसद हर्ष महाजन, सिकंदर कुमार और चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा के साथ बचत भवन पहुंचे। सभी सदस्य बचत भवन में चले गए जबकि मंत्री सांसद कार्यालय परिसर के बाहर नतीजों का इंतजार करते रहे। दोपहर 12:30 बजे जैसे ही चुनाव नतीजे सामने आए कि सबसे पहले कांग्रेस जिला परिषद सदस्य चुपचाप बचत भवन से बाहर आए और मालरोड की ओर रवाना हुए। इसके बाद विजेता भाजपा सदस्यों ने सांसदों की अगुवाई में उपायुक्त कार्यालय परिसर से वाया सीटीओ लोअर बाजार होते हुए नाज चौक तक विजयी रैली निकाली। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने नाटियां भी डालीं और शीर्ष नेताओं को जीत की बधाई दी।
102 दिन बाद हुए चुनाव
जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए 31 मई और पहली जून को चुनाव नतीजे जारी हो गए थे। इसके बाद से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव का इंतजार था। अगस्त में भी बैठक बुलाई गई लेकिन इसमें भाजपा और कांग्रेस के सदस्य नहीं पहुंचे। अब कोर्ट के आदेश पर 10 सितंबर यानी वीरवार को चुनाव करवाए गए। इसमें भाजपा ने जीत हासिल की। हालांकि, इस चुनाव से पहले भाजपा को भी अपने सदस्य एकजुट रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। सदस्यों को दूसरे राज्यों में ले जाकर भी ठहराया गया था। जिला भाजपा अध्यक्ष केशव चौहान ने बताया कि कांग्रेस के पास पहले ही पूर्ण बहुमत नहीं था। कांग्रेस सिर्फ झूठ बोलकर गुमराह कर रही थी। चुनाव के बाद सभी के सामने असली नतीजे आ गए हैं। कांग्रेस का बहुमत का दावा झूठा था, जो अब बेनकाब हो गया।
सुक्खू का शासन जिला शिमला में भी रिजेक्ट : महाजन
शिमला। सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का शासन जिला शिमला में भी रिजेक्ट हो गया है। जिला परिषद में कई साल बाद भाजपा ने कब्जा जमाया है। यह कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश है। यह 2027 चुनाव की शुरुआत है और भाजपा 2027 में सत्ता में काबिज होने वाली है।
जिला परिषद में दिखा दी ताकत : सिकंदर
सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि भाजपा पर जनता ने भरोसा किया है। शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की सीट पर भाजपा के सदस्यों को चुना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ने कहा था कि जिला परिषद सदस्यों की एक दिन की वैल्यू है, आज जिला परिषद सदस्यों ने सरकार को दिखा दिया है कि उनकी क्या ताकत है। 102 दिन बाद भी भाजपा ने कब्जा किया है। कांग्रेस के कुछ जिला परिषद सदस्यों ने भी भाजपा को वोट दिया है, जो बताता है कि वे भी कांग्रेस के शासन से दुखी हैं।