दुर्लभ चीयर फीजेंट के सरंक्षण में हिमाचल प्रदेश वन विभाग को बड़ी कामयाबी मिली है। प्राकृतिक आवास में छोड़ने के बाद चीर फीजेंट का सरवाइवल रेट 93 फीसदी पाया गया है। लगातार घटती संख्या के कारण चीयर फीजेंट को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने संकटग्रस्त पक्षी की श्रेणी में रखा है। चीर फीजेंट हिमाचल के अलावा उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पाए जाते हैं, इनका एकमात्र प्रजनन केंद्र शिमला के समीप चायल में संचालित हो रहा है। हिमाचल प्रदेश वन विभाग वन्यप्राणी विंग ने नवंबर 2023 में 12 चीर फीजेंट को प्राकृतिक आवास में छोड़ा था, 10 महीने बाद भी 12 में से 11 पक्षी ट्रैक हो रहे हैं। इन पक्षियों पर ट्रांसमीटर लगाए गए हैं जिनसे इनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
खास बात यह है कि इन पक्षियों ने जंगली चीर फीजेंट के साथ बच्चे भी दिए हैं जिसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी अमिताभ गौतम ने बताया कि दुर्लभ चीर फीजेंट का सरवाइवल रेट करीब 92 फीसदी रहा है। 3 अक्तूबर को दुर्लभ चीर फीजेंट श्रेणी के 10 पक्षी प्राकृतिक आवास में छोड़े जाएंगे। प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी अमिताभ गौतम ने बताया कि राज्य स्तरीय वन्यप्राणी सप्ताह दो से 8 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। 2 अक्तूबर वन्य प्राणी सप्ताह का उद्घाटन लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पाॅटर्स-हिल कंजरवेशन रिजर्व में स्वच्छता अभियान के साथ करेंगे। 5 अक्तूबर को शिमला वाटर कैचमेंट ढली में पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाएंगे।