संघ ने निगम के परिवहन बेड़े और संपत्तियों को लेकर भी सवाल उठाए
संघ ने निगम के परिवहन बेड़े और संपत्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। मदन राणा के अनुसार निगम की 70 बसों में से अब केवल दो बसें चलने की स्थिति में हैं। रोहड़ू से मनाली तक निगम की संपत्तियां बेचे जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के मेडिकल बिल तक लंबित हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों पर भी संघ ने सवाल उठाए। आरोप लगाया कि करीब 500 आउटसोर्स कर्मचारियों में से 200 चेयरमैन के विधानसभा क्षेत्र से लगाए गए हैं। संघ का दावा है कि इनमें से कुछ को बिना प्रशिक्षण के जिम्मेदारियां दी गई हैं और वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए निर्धारित आवास भी उन्हें उपलब्ध करवाए गए हैं।
होटलों के जीर्णोद्धार की नीति पर भी उठे सवाल
मदन राणा ने आरोप लगाया कि पहले होटलों का जीर्णोद्धार चरणबद्ध तरीके से किया जाता था, जिससे आय प्रभावित न हो। अब पूरे होटल को एक साथ बंद कर काम करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुल्लू-मनाली के चार होटलों में ऐसा किया गया और अब शिमला के होटल पीटरहॉफ में भी इसकी तैयारी है। संघ के अनुसार इससे लंबे समय तक होटल की आय प्रभावित होती है। संघ ने छराबड़ा के होटल वाइल्ड फ्लावर हॉल से सरकार को मिले 401 करोड़ और हर महीने होने वाली करीब 1.25 करोड़ रुपये की आय को लेकर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि यह राशि निगम के खाते में नहीं आ रही है।