अदालत ने मामले में पेश किए गए डीएनए साक्ष्यों की प्रक्रिया में भी गंभीर खामियां पाईं। जांच के दौरान साक्ष्य जुटाने और डीएनए प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर उठे सवालों के चलते अदालत ने अभियोजन के वैज्ञानिक साक्ष्य को भी आरोपी के खिलाफ निर्णायक नहीं माना।
अदालत ने कहा कि आपराधिक मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करना अभियोजन पक्ष की जिम्मेदारी है। जब मुख्य गवाहों के बयान आरोपों का समर्थन नहीं करते और साक्ष्यों की प्रक्रिया में गंभीर कमियां हों, तो आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने वीरू को दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों से बरी कर दिया।