शिमला। शहर में दस फीसदी प्रापर्टी टैक्स बढ़ना तय है। टैक्स बढ़ोतरी के प्रस्ताव में हुए ताजा संशोधन के बाद अब ज्यादातर पार्षद इसके समर्थन में आ गए हैं। सरकार से भी लगभग इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है। नगर निगम का मासिक सदन शुक्रवार को होगा।
नगर निगम ने पहले हर साल दस फीसदी टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव बनाया था। लेकिन पार्षदों के सुझाव के बाद जनता को राहत देते हुए प्रस्ताव में संशोधन किया गया। अब हर तीन साल बाद टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। संशोधन के बाद ज्यादातर पार्षद इस पर राजी हो गए हैं। हालांकि, कुछेक विरोध भी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार निगम प्रशासन और पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर सचिवालय और स्थानीय विधायक एवं शिक्षामंत्री से बात कर ली है। निगम ने तर्क दिया है कि छह साल से प्रापर्टी टैक्स नहीं बढ़ा है। दस फीसदी टैक्स बढ़ने से छोटे भवन मालिकों और मर्ज एरिया के लोगों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। इसके अलावा पानी और बिजली की तरह टैक्स में सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। निगम की वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकार स्तर से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। ऐसे में यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए शुक्रवार को नगर निगम के मासिक सदन में रखे जाएंगे। हालांकि, टैक्स कितना बढ़ेगा, इस पर अंतिम फैसला सदन ही लेगा।
20 से 100 रुपये तक बढ़ेगा टैक्स
शहर में कुल 28 हजार संपत्तियां हैं जिनसे नगर निगम को सालाना 12 करोड़ रुपये टैक्स मिलता है। 2014 से शहर में टैक्स नहीं बढ़ाया है। ज्यादातर भवन मालिक 200 से 1000 रुपये तक टैक्स दे रहे हैं। दस फीसदी बढ़ोतरी के बाद इनका टैक्स 20 से 100 रुपये बढ़ेगा, वो भी तीन साल बाद बढ़ाया जाएगा।
इन प्रस्तावों पर भी आएगा फैसला
मासिक बैठक में कूड़ा शुल्क भुगतान की सुविधा आनलाइन करने, टैक्स न देने वाले डिफाल्टरों का बिजली-पानी काटने, कई कर्मचारियों को प्रमोशन देने, नए पद भरने जैसे अहम प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी। मर्ज एरिया की ग्रांट घटाए जाने पर भी पार्षद सदन में हंगामा कर सकते हैं।