हिमाचल प्रदेश के हाई प्रोफाइल फोन टैपिंग मामले में आरोपी पूर्व डीजी पुलिस आईडी भंडारी सेशन कोर्ट से बरी हो गए हैं। निचली अदालत के बाद सत्र न्यायालय से बरी होने के बाद डीजी ने कहा कि जिन लोगों के कारण उनकी साख गिरी, परेशान रहे और पद से हटाया गया उन्हें वे छोड़ेंगे नहीं।
वकीलों से सलाह लेकर झूठे आरोप लगाने वाले पुलिस और अन्य अधिकारियों पर मानहानि का केस कर सकते हैं। भंडारी ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट में जाने के सवाल पर कहा कि उस समय मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ कई बयान दिए थे। उसे देखते हुए उनके खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।
पूर्व डीजी भंडारी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पांच वर्ष पहले वीरभद्र सिंह के सीएम पद की शपथ लेने से एक दिन पहले सीआईडी मुख्यालय में तत्कालीन मुख्यसचिव, गृहसचिव और डीआईजी स्तर के अधिकारियों ने अवैध रूप से दबिश दी। उस समय वे सीआईडी के प्रमुख थे। आरोप लगाया गया कि फोन टैपिंग की कुछ सीआईडी तोड़ी गई हैं।
अवैध तरीके से फोन टैप हुए हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। भंडारी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को अवगत करवाया कि फोन टैपिंग की प्रक्रिया वैधानिक और नियमसंगत तरीके से होती है। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से 14 सौ फोन टैपिंग की बात झूठी साबित हुई केवल दो फोन टैप हुए, जिसमें एक तिब्बती नागरिक का था तो दूसरा कोई सब्जी वाला था।
भंडारी ने आरोप लगाया कि सीएम के आदेश पर उन पर केस बनाए गए और वे केवल अकेले आरोपी बनाए गए। उन्होंने कहा कि खुद को इस मामले से अलग करने की निचली अदालत में याचिका दी। निचली अदालत ने कहा कि मामला झूठा है और 25 मई 2016 को बरी किया।
इसके बाद एक एक पुलिस अधिकारी ने इसके खिलाफ फिर सेशन कोर्ट में केस किया। पांच दिन पहले 20 नवंबर को कोर्ट का फैसला उनके हक में आया है। अब वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और इसके लिए वे कानूनविदों से चर्चा कर रहे हैं।